FIFA World Cup 2026

'फर्जी खबर फैलाने वालों की खैर नहीं', UAE में गलत पोस्ट शेयर करने पर 35 गिरफ्तार; 19 भारतीयों पर भी गिरी गाज

UAE ने फर्जी खबर फैलाने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन उठाया है. मिडिल ईस्ट जंग से जुड़ी गलत खबरों को फैलाने वाले 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 19 भारतीय हैं.

X (@TradingLara)
Shanu Sharma

संयुक्त अरब अमीरात ने फर्जी वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. वहां की पुलिस ने कुल 35 लोगों को गिरफ्तारी करने का आदेश जारी किया है. जिनमें 19 भारतीयों का भी नाम शामिल हैं. प्रशासन द्वारा यह एक्शन मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध से जुड़ी अफवाहों को फैलाने वालों के खिलाफ लिया गया है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए. जिसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया. हालांकि कुछ लोगों ने इस लड़ाई से जुड़ी कई गलत जानकारियां फैलानी शुरु कर दी, जिनपर पुलिस ने अब एक्शन लेते हुए गिरफ्तार कर लिया है. 

UAE अधिकारियों ने ऐसे की कार्रवाई

UAE अधिकारियों द्वारा यह कार्रवाई दो हिस्सों में की  गई. सबसे पहले शनिवार को 10 लोगों के खिलाफ आदेश आया, इन 10 में से दो भारतीय थे. इसके अगले ही दिन रविवार को 25 और लोगों की सूची जारी की गई. जिसमें 17 भारतीयों का नाम शामिल हैं. दोनों लिस्ट के मुताबिक अब कुल 35 लोग जांच के दायरे में हैं. यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने तेज मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है. यूएई के अधिकारियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी की है.


जांच से पता चला कि आरोपी फर्जी और छेड़छाड़ वाले वीडियो पोस्ट कर रहे थे. इनका मकसद जनता में दहशत फैलाना और स्थिरता को कमजोर करना था. हालांकि अधिकारियों ने बताया कि सभी लोग 3 हिस्सों में बंटे हुए थे पहले समूह में पांच भारतीय, एक पाकिस्तानी, एक नेपाली, दो फिलिपीनी और एक मिस्र नागरिक थे. जिनके द्वारा असली वीडियो क्लिप पोस्ट किए गए. इनमें यूएई के हवाई क्षेत्र में मिसाइल गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य थे. उन्होंने भीड़ के जमावड़े की फुटेज में टिप्पणियां और साउंड इफेक्ट जोड़े. इससे लगता था कि हमला हो रहा है. इससे लोगों में घबराहट फैल सकती थी. रक्षा क्षमताओं का खुलासा होने का खतरा भी था.

फर्जी खबरों के लिए AI का इस्तेमाल 

अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किए गए दूसरे समूह में सात लोग थे. इनमें पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल थे. उन्होंने AI से नकली वीडियो बनाए. इनमें विस्फोट, मिसाइल हमले और आग के दृश्य दिखाए गए. वे दावा करते थे कि ये घटनाएं यूएई में हुई हैं. क्लिप में राष्ट्रीय झंडे या तारीखें जोड़कर उन्हें असली दिखाने की कोशिश की गई. वहीं तीसरे समूह में छह लोग थे. इनमें पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल थे.

उन्होंने सामग्री से ईरान और उसके नेतृत्व का महिमामंडन किया जा रहा था. इन लोगों ने सैन्य आक्रामकता को उपलब्धि बताया. इससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा. यूएई में ऐसे अपराध गंभीर माने जाते हैं, दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल की जेल और 1 लाख दिरहम जुर्माना हो सकता है. इन वीडियो में झूठा दावा किया गया कि सुरक्षा खतरे में है, कुछ क्लिप में सैन्य ठिकानों के तबाह होने या विदेशी घटनाओं को यूएई से जोड़ा गया.