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Year Ender 2024: पीएम मोदी और राहुल गांधी के इन बयानों की सबसे अधिक हुई चर्चा, सीएम योगी के 'बंटेंगे तो कटेंगे' ने तोड़ा रिकॉर्ड

साल 2024 में भारतीय राजनीति में कई ऐसे बयान और घटनाएं चर्चा का केंद्र बने, जिन्होंने न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित किया, बल्कि समाज में भी गहरी चर्चा को जन्म दिया. इनमें कुछ बयानों ने राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की स्थिति को नया मोड़ दिया, जबकि कुछ बयानों ने विवादों को जन्म दिया.

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Kamal Kumar Mishra

Year Ender Politics 2024: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस साल अपने विवादित बयानों के कारण सबसे अधिक सुर्खियों में रहे. हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा के खिलाफ जोरदार प्रतिक्रिया दी. इस दौरान उन्होंने "बंटेंगे तो कटेंगे" का नारा दिया, साथ ही कहा कि राष्ट्र तभी आगे बढ़ेगा जब हम एकजुट रहेंगे. उनका यह बयान खासा चर्चित हुआ और राजनीति में हलचल मचाई.

'एक हैं तो सेफ हैं'

साल 2024 में ही सीएम योगी के "बंटेंगे तो कटेंगे" बयान के बाद प्रधानमंत्री ने भी इसी के जैसा बयान दिया 'एक हैं तो सेफ हैं', जिसकी खूब चर्चा हुई. इन बयानों के जरिए बीजेपी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा और देश में जाति जनगणना पर सवाल खड़ा किए.

'आत्मनिर्भर भारत'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" के विचार ने इस वर्ष बड़ी चर्चा पैदा की. प्रधानमंत्री ने लगातार यह मुद्दा उठाया कि भारत को विदेशी सामान पर निर्भरता कम करनी चाहिए और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए. इस विचार को लेकर राजनीतिक पार्टियों में विभाजन देखने को मिला, जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी इसे देश की समृद्धि का मार्ग मानती रही, वहीं विपक्ष ने इसे एक प्रचार अभियान और अर्थव्यवस्था की वास्तविकता से दूर बताया.

'भारत जोड़ो यात्रा'

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के "भारत जोड़ो यात्रा" के दौरान दिए गए बयानों ने भी 2024 में काफी ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने भाजपा पर देश की सामाजिक और सांस्कृतिक धारा को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी केवल चुनावी रणनीति के तहत धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने का काम कर रही है. इस बयान ने न केवल उनके और उनकी पार्टी के बीच का संदेश मजबूत किया, बल्कि भाजपा के नेताओं के खिलाफ भी कई बयान दिए गए, जो राजनीति के उग्र रूप को दर्शाते हैं.

इसके अलावा, 2024 के लोकसभा चुनावों में "आत्मनिर्भर भारत" के मुद्दे के साथ-साथ "धर्मनिरपेक्षता" और "समानता" जैसे विचारों पर भी व्यापक बहस हुई. राजनीतिक नेताओं ने अपनी-अपनी विचारधाराओं को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए और बयानबाजी की, जिसने भारतीय राजनीति को नए विवादों से भर दिया.