'जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक रुकेंगे नहीं', NEET यूजी पेपर लीक पर बोले राहुल गांधी
नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद कांग्रेस लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा नहीं बना सकी.
नीट यूजी पेपर लीक मामले में विपक्ष शांत बैठने के मूड में नजर नहीं आ रहा है. रविवार को राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता तब तक कांग्रेस शांत नहीं बैठेगी. उन्होंने एक्स पर हैदराबाद में छात्रों के प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया जिसमें विरोध करने वाले छात्र नीट पेपर लीक के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए.
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि जब लाखों युवा सड़कों पर हों और 22 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो और पीएम मोदी चुप हों तो यह साफ है कि सरकार जवाब देने के बजाय बचने की कोशिश में लगी है. उन्होंने आगे लिखा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते और नीट जैसे पेपर लीक मामलों को रोकने के लिए फुलप्रूफ व्यवस्था लागू नहीं हो जाती तब त क हम (कांग्रेस) रुकेंगे नहीं.
नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद कांग्रेस लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा नहीं बना सकी. बता दें कि राहुल गांधी पिछले सप्ताह से ही नीट यूजी पेपर लीक को लेकर सरकार को घेर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी की इटली यात्रा को लेकर भी कटाक्ष किया था.
उन्होंने कहा कि जब मोदी जी इटली में टॉफी बांटते हुए रील बना रहे थे तब भारत में पेपर लीक से त्रस्त युवा न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे क्योंकि नीट पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया है. कई बच्चों ने अपनी जान तक गंवा दी लेकिन मोदी जी ने ना तो जिम्मेदारी ली और न ही धर्मेंद्र प्रधान को हटाया और न ही एक शब्द कहा.
वीरा पासी की मूर्ति का किया अनावरण
राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में 1857 की क्रांति के एक कम चर्चित योद्धा वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. यूपी की राजनीति में इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और सभी राजनीतिक दल दलित खासकर पासी समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं.