ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों है भारत के लिए खतरा? पाकिस्तान और चीन के लिए फायदे का सौदा

पाकिस्तान भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाने का जमीनी रास्ता नहीं देता. ऐसे में ईरान ही भारत का एकमात्र पश्चिमी रास्ता है.

@MAmirizadeh
Sagar Bhardwaj

ईरान में लंबे समय से आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और राजनीतिक लचरता के कारण विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान का नेतृत्व इन हालात को संभालने में जूझ रहा है. अगर वहां सत्ता परिवर्तन या लंबे समय तक अस्थिरता आती है, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति बदल सकती है.

भारत के लिए ईरान क्यों अहम है

भारत और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक और रणनीतिक रहे हैं. पाकिस्तान भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाने का जमीनी रास्ता नहीं देता. ऐसे में ईरान ही भारत का एकमात्र पश्चिमी रास्ता है. ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए बेहद अहम है, जिससे भारत पाकिस्तान को बायपास कर मध्य एशिया तक पहुंच बना सकता है. भारत ने इस प्रोजेक्ट में अरबों रुपये का निवेश किया है.

सत्ता परिवर्तन से भारत को क्या नुकसान

अगर ईरान में सरकार कमजोर होती है या बदलती है, तो चाबहार जैसे प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकते हैं. अस्थिर माहौल में सुरक्षा, प्लानिंग और निवेश पर असर पड़ता है. इससे भारत की रणनीतिक पहुंच सीमित हो सकती है और टैक्सपेयर्स के पैसे पर भी जोखिम बढ़ेगा.

पाकिस्तान को कैसे मिल सकता है फायदा

ईरान अब तक पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करता रहा है. शिया नेतृत्व ने कई बार पाकिस्तान समर्थित कट्टरपंथी संगठनों का विरोध किया है. अगर ईरान कमजोर होता है, तो यह संतुलन टूट सकता है और पाकिस्तान का असर क्षेत्र में बढ़ सकता है, खासकर अफगानिस्तान के संदर्भ में.

चीन की बढ़ती भूमिका

ईरान पहले से ही चीन के करीब है. दोनों देशों के बीच 25 साल का रणनीतिक समझौता है. पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते ईरान चीन पर तेल बिक्री और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निर्भर है. अगर ईरान में अराजकता बढ़ती है, तो नई सरकार भी चीन की मदद पर ज्यादा निर्भर हो सकती है, जिससे चीन का दबदबा और बढ़ेगा.

भारत की आगे की रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कूटनीतिक संपर्क और हालात पर लगातार नजर रखना जरूरी है. भारत के लिए सबसे सही रास्ता है- सावधानी, संतुलन और तैयारी, ताकि किसी भी हालात में राष्ट्रीय हित सुरक्षित रह सकें.