क्या खत्म हो जाएगा इंटरनेट युग, अमेरिका-ईरान युद्ध बढ़ने से लाल सागर में इंटरनेट केबल कटने का खतरा बढ़ा, भारत पर क्या पड़ेगा असर?

सितंबर 2025 में लाल सागर में केबल कटने की घटना हो चुकी है. उस वक्त एक जहाज के लंगर खींचने से कई महत्वपूर्ण केबल क्षतिग्रस्त हो गए थे. इससे भारत, पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरब समेत कई देशों में इंटरनेट की स्पीड धीमी पड़ गई थी और कनेक्टिविटी प्रभावित हुई थी. प्रभावित प्रमुख केबल:-

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है. इस युद्ध में यमन के हूती विद्रोही भी शामिल हो गए हैं. अब लाल सागर में अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल कटने और इंटरनेट बाधित होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हूती समूह पहले भी कई बार इन केबलों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे चुका है. ईरान ने भी अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी चेतावनी दी है.

सितंबर 2025 में लाल सागर में केबल कटने की घटना हो चुकी है. उस वक्त एक जहाज के लंगर खींचने से कई महत्वपूर्ण केबल क्षतिग्रस्त हो गए थे. इससे भारत, पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरब समेत कई देशों में इंटरनेट की स्पीड धीमी पड़ गई थी और कनेक्टिविटी प्रभावित हुई थी.

प्रभावित प्रमुख केबल:-

साउथ ईस्ट एशिया–मिडिल ईस्ट–वेस्टर्न यूरोप 4 (SEA-ME-WE 4)

इंडिया-मिडिल ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप (IMEWE)

FALCON GCX

यूरोप इंडिया गेटवे (EIG)

ये केबल भारत को यूरोप और मध्य पूर्व से जोड़ते हैं. इनमें से SEA-ME-WE 4 का संचालन टाटा कम्युनिकेशंस करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि लाल सागर में समस्या होने पर भारत के करीब 25 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है.

भारत पर संभावित असर

अगर केबल फिर कट गए तो यूरोप और अमेरिका की तरफ डेटा भेजने में देरी हो सकती है. वेबसाइट लोडिंग धीमी पड़ सकती है, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सर्विस, वीडियो कॉल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है. घरेलू इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन स्पीड कम हो सकती है और लेटेंसी बढ़ सकती है.

सरकार सतर्क

भारत सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों और केबल ऑपरेटर्स से contingency प्लान बनाने को कहा है. कंपनियां अब वैकल्पिक रूट्स जैसे अन्य समुद्री केबल या ओवरलैंड रूट्स की तलाश कर रही हैं. हालांकि पूरी दुनिया के इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा इन केबलों पर निर्भर है. इसलिए लाल सागर या होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बड़ा हमला वैश्विक स्तर पर समस्या पैदा कर सकता है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर 2025 वाली घटना में मरम्मत में कई महीने लग गए थे. अगर युद्ध के कारण नई समस्या आई तो मरम्मत और मुश्किल हो सकती है क्योंकि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है.