Telangana Tunnel Collapse: मंत्री ने कहा टनल में फंसे मजदूरों के बचने की उम्मीदें कम; गाद, पानी से रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही बाधा
तेलंगाना सरकार ने भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों को बचाव अभियान में लगाया है. हालांकि, एसएलबीसी परियोजना के फंसे हुए मजदूरों को निकालने के अथक प्रयासों के बावजूद रविवार को कोई सफलता नहीं मिली.
तेलंगाना के नागरकर्नूल जिले में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे आठ मजदूरों के बचने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं. तेलंगाना के मंत्री जे. कृष्णा राव ने रविवार को कहा कि मजदूरों के जीवित बचने की संभावना "बहुत अच्छी नहीं" है.
बचाव कार्य में बाधाएं
तेलंगाना सरकार ने भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों को बचाव अभियान में लगाया है. हालांकि, एसएलबीसी परियोजना के फंसे हुए मजदूरों को निकालने के अथक प्रयासों के बावजूद रविवार को कोई सफलता नहीं मिली.
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मंत्री कृष्णा राव का बयान
मंत्री कृष्णा राव, जो खुद सुरंग के अंदर गए, ने संवाददाताओं को बताया, "सुरंग के अंदर इतनी ज्यादा गाद जमा हो गई है कि चलना असंभव है. बचावकर्मी रबर ट्यूब और लकड़ी के तख्तों का उपयोग करके आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि मजदूरों के जीवित रहने की संभावना कम है. "हम कह नहीं सकते. हम आशावादी हैं, लेकिन जिस तरह की घटना हुई है वह बहुत गंभीर थी और संभावना है कि हम कह नहीं सकते. जीवित रहने की संभावना का हम अनुमान नहीं लगा सकते. संभावनाएं अच्छी नहीं हैं," उन्होंने कहा.
सुरंग के अंदर की स्थिति
उन्होंने बताया कि सुरंग ढहने के बाद कुछ बचे लोग तैरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए. राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए वीडियो में बचावकर्मी गाढ़े कीचड़, उलझी हुई लोहे की छड़ों और सीमेंट के ब्लॉकों के बीच से गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं.
घटना का विवरण
राज्य सरकार ने मीडिया को बताया कि शनिवार सुबह जब सुरंग ढही, तब 70 लोग अंदर काम कर रहे थे. उनमें से अधिकांश लोग आंतरिक ट्रेन का उपयोग करके निर्माणाधीन सुरंग से बाहर निकल आए. सरकार ने बताया कि सुरंग के ढहे हुए हिस्से का अंतिम 200 मीटर लंबा हिस्सा पानी और गाद से भर गया है.
भारी मशीनरी की समस्या
मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि इलाके के कारण भारी मशीनरी को सुरंग में ले जाना मुश्किल हो गया है. जो टीमें 13 किलोमीटर के निशान तक पहुंचने में कामयाब रहीं, उन्होंने मजदूरों के नाम चिल्लाए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
जिला कलेक्टर का बयान
नागरकर्नूल जिला कलेक्टर बी. संतोष ने भी बताया कि फंसे हुए लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है.
बचावकर्मी की चुनौती
एक बचावकर्मी ने मीडिया को बचाव अभियान की चुनौतियों के बारे में बताया. "13.5 किलोमीटर के बिंदु से 2 किलोमीटर पहले पानी भर गया है. यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इस कारण से, हमारे भारी उपकरण अंतिम बिंदु तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. इसलिए, पानी निकालना आवश्यक है, जिससे उपकरण आगे पहुंच सकें."