T20 World Cup 2026

'ये कैसा बयान...', SC के लपेटे में तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी, के कविता की जमानत के फैसले पर उठाए थे सवाल

Supreme Court on Revanth Reddy: दिल्ली शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस नेता के कविता को जमानत दी थी. उनके जमानत मिलने पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सवाल खड़े करते हुए कहा था कि कैसे उन्हें इतनी जल्दी जमानत मिल गई. इस मामले सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की है.

Social Media
India Daily Live

Supreme Court on Revanth Reddy: दिल्ली शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस लीडर के कविता को जमानत दी थी. कोर्ट के इस फैसले पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि रेड्डी ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया था कि कविता को सिर्फ पांच महीने बाद जमानत क्यों मिल गई?  आप नेता मनीष सिसोदिया जैसे अन्य लोगों को लंबी अवधि के लिए जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. अब उनके इस बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लताड़ लगाई है. 

सुप्रीम कोर्ट  ने गुरुवार को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के सिलसिले में बीआरएस नेता के कविता को दी गई जमानत के संबंध में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई.

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने क्या कहा था?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया था कि यह सच है कि बीआरएस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में BJP की जीत के लिए काम किया. ऐसी भी चर्चा है कि कविता को बीआरएस और भाजपा के बीच समझौते के कारण जमानत मिली.

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्त की नाराजगी?

रेड्डी की टिप्पणियों से नाराज SC ने कहा कि इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों के मन में आशंकाएं पैदा हो सकती हैं. न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने रेड्डी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि क्या आपने अखबार में पढ़ा है कि उन्होंने क्या कहा? उन्होंने जो कहा है, उसे पढ़िए. एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री द्वारा यह किस तरह का बयान है. इससे लोगों के मन में आशंकाएं पैदा हो सकती हैं. क्या यह एक ऐसा बयान है जो एक मुख्यमंत्री द्वारा दिया जाना चाहिए? एक संवैधानिक पदाधिकारी इस तरह से बोल रहा है?

हम विधायिका ने में हस्ताक्षेप नहीं करते- SC

सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि संस्थाओं के प्रति परस्पर सम्मान रखना और एक दूसरे से दूरी बनाए रखना एक मौलिक कर्तव्य है. SC ने कहा कि हम हमेशा कहते हैं कि हम विधायिका में हस्तक्षेप नहीं करते तो उनसे भी यही अपेक्षा की जाती है. क्या हम राजनीतिक विचारों के आधार पर आदेश पारित करते हैं? 

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के कैश-फॉर-वोट घोटाला मामले में तेलंगाना से भोपाल में मुकदमे को ट्रांसफर करने की मांग करने वाली PIL पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें तेंलगाना के मुख्यमंत्री एक आरोपी हैं.