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वाई खेमचंद सिंह ने ली मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ, जानें बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण होगा कार्यकाल

मणिपुर में एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है. इसके साथ ही भाजपा नेता वाई खेमचंद सिंह ने राज्य के नये मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. NDA के समर्थन से बनी इस नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

ani
Kuldeep Sharma

इंफाल: जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे मणिपुर को आखिरकार नई निर्वाचित सरकार मिल गई है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता वाई खेमचंद सिंह ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के अधीन रहे मणिपुर में यह सत्ता परिवर्तन एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है. शपथ ग्रहण के साथ ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की गई है.

मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्रियों ने भी ली शपथ

वाई. खेमचंद सिंह के साथ कूकी समुदाय से आने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नागा पीपुल्स फ्रंट के नेता एल. डिखो ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके अलावा कोंथौजम गोविंदास सिंह और खुराइजम लोकेन सिंह ने मंत्री पद संभाला. शपथ ग्रहण समारोह को राज्य में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है.

नई दिल्ली में बनी नेतृत्व पर सहमति

खेमचंद सिंह को भाजपा विधायक दल का नेता नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में चुना गया. बैठक में मणिपुर के 37 में से 35 भाजपा विधायक मौजूद रहे. इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हुए. इसके बाद एनडीए सहयोगी दलों ने भी सर्वसम्मति से उनके नेतृत्व का समर्थन किया.

राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दिया था. उनकी सरकार पर मई 2023 से शुरू हुए मैतेई और कूकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष को नियंत्रित न कर पाने के आरोप लगे थे. हालात बिगड़ने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया. एक साल बाद नई सरकार का गठन मणिपुर के लिए राजनीतिक रूप से अहम मोड़ माना जा रहा है.