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PMML ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, सोनिया गांधी से वापस मांगे नेहरू के 51 डिब्बे

PMML ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 51 डिब्बों को वापस करने की मांग की गई है. पीएमएमएल ने 51 डिब्बों का ऐतिहासिक महत्व बताया है.

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Shanu Sharma

PMML: भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के पास आजादी से पहले और उस दौरान के कई दस्तावेज थे. ये डॉक्यूमेंट्स इस समय कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के पास है. जिसकी वापसी के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय के सदस्य रिज़वान कादरी ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और नेहरू के पर पोते राहुल गांधी से मदद मांगी है. 

कादरी ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू से जुड़े दस्तावेजों के 51 डिब्बों को 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान सोनिया गांधी को सौपा गया था. जिसमें नेहरु द्वारा लिखे गए कई पत्र है. उन्होंने ये पत्र अल्बर्ट आइंस्टीन, जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, विजया लक्ष्मी पंडित, अरुणा आसफ अली, एडविना माउंटबेटन,  बाबू जगजीवन राम और गोविंद बल्लभ पंत को लिखे थे. 

दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व

प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय की ओर से राहुल गांधी को पत्र लिख उसे वापस देने की मांग की गई है. हालांकि इससे पहले PMML सोसाइटी के सदस्यों की तरफ से सोनिया गांधी को भी पत्र लिखा गया था. हालांकि इस संदर्भ में सोनिया गांधी की ओर कोई खास एक्शन नहीं लिया गया. इस संगठन का कहना है कि इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व है. जिसे जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल ने पीएमएमएल को 1971 में दिया था. लेकिन 2008 में इसे वापस ले लिया गया.

अब पीएमएमएल की ओर से गांधी परिवार से ऑरिजनल दस्तावेज या फिर उसकी फोटोकॉपी की मांग की जा रही है. पत्र लिखते हुए PMML सोसाइटी ने कहा कि हमें पता है कि ये पत्र नेहरू परिवार के लिए व्यक्तिगत महत्व रखता है लेकिन PMML का मानना है कि इन पत्रों का ऐतिहासिक महत्व है. इन सभी दस्तावेजों से शोधकर्ताओं को बहुत लाभ मिलेगा. 

इनके हाथों में PMML की कमान

बता दें कि PMML अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. वहीं उपाध्यक्ष के पद पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पदस्थ हैं. इसके अलावा इस सोसाइटी के  29 सदस्य भी है. जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी शामिल हैं. इसका कार्यकाल 4 नवंबर को खत्म होना था, लेकिन इसे अभी कुछ महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है. वहीं इस सोसाइटी का नाम जून 2023 में बदला गया था. इससे पहले प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता था. इस नाम को NMML सोसाइटी की बैठक में बदलने का फैसला लिया गया था.