बड़े और रिटायर अफसरों के किताब लिखने पर लग सकती है 20 साल की रोक, जानें नरवणे विवाद के बाद क्या है सरकार का प्लान

सरकार सीनियर मिलिट्री और सरकारी अधिकारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है. यह कदम जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब को लेकर हुए विवाद के बाद उठाया गया है.

@DeepakRajGuruG x account
Km Jaya

नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने के मामले में सीनियर आर्मी और सरकारी अधिकारियों के लिए सख्त नियमों पर विचार किया जा रहा है. सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत सीनियर आर्मी अधिकारी, जिनमें ऊंचे सरकारी पदों पर काम करने वाले अधिकारी भी शामिल हैं.

रिटायरमेंट के बाद कम से कम 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लगाएंगे. वे इस पीरियड के पूरा होने से पहले अपनी किताबें या यादें पब्लिश नहीं कर पाएंगे. इस बारे में जल्द ही एक फॉर्मल ऑर्डर जारी होने की उम्मीद है.

क्या है इसकी वजह?

यह पूरी घटना पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड ऑटोबायोग्राफी, 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर चल रहे पॉलिटिकल विवाद के बीच हुई है. अगस्त 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान की घटनाओं के बारे में किताब के दावों पर पिछले दो हफ्तों से संसद में गरमागरम बहस चल रही है.

सरकार की क्या राय है?

यह मुद्दा शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में चर्चा के लिए आया. हालांकि इसे ऑफिशियल 27-पॉइंट एजेंडा में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन आम चर्चा के दौरान, कई मंत्रियों ने सुझाव दिया कि रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के लिए लंबा कूलिंग-ऑफ पीरियड जरूरी होना चाहिए. सूत्रों ने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है.

नरवणे की किताब को लेकर क्यों भड़का विवाद?

नरवणे की किताब को लेकर विवाद 2 फरवरी को और बढ़ गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में आत्मकथा का ज़िक्र करने की कोशिश की. सरकार ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है. इसके बाद राहुल गांधी किताब की एक कॉपी लेकर संसद पहुंचे ताकि इसकी मौजूदगी साबित हो सके. जल्द ही किताब का एक PDF सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने लगा.

किताब के पब्लिशर ने क्या कहा?

इसके बाद पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि किताब का कोई भी हिस्सा, चाहे वह प्रिंट में हो या डिजिटल, गैर-कानूनी तरीके से फैलाया जा रहा है और यह कॉपीराइट का उल्लंघन है. पब्लिशर ने साफ किया कि वह ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.

दिल्ली पुलिस ने क्या लिया एक्शन?

इस बयान से कुछ घंटे पहले ही दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करके जांच शुरू की थी. इसके बाद मंगलवार को नरवणे ने अपनी चुप्पी तोड़ी और पब्लिशर के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी किताब न तो पब्लिश हुई है और न ही किसी भी रूप में पब्लिक की गई है.