नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच जारी जुबानी जंग अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल विवाद तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मातृशक्ति के अपमान और प्रशासनिक चूक के आरोपों पर ममता ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय उनकी सरकार को निशाना बनाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. मुख्यमंत्री ने संवैधानिक मर्यादाओं और राष्ट्रपति के वास्तविक सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
ममता बनर्जी ने कहा कि हर चुनाव के दौरान केंद्र सरकार उन्हें और उनकी सरकार को बेवजह निशाना बनाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, बंगाल सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया जाने लगता है. मुख्यमंत्री के अनुसार. यह सब केवल राजनीतिक वोट बैंक के लिए किया जाता है. उन्होंने केंद्र को नसीहत दी कि वे हर मामले में राज्य सरकार को दोष देना बंद करें. क्योंकि वे जनता के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं.
राष्ट्रपति मुर्मू के कार्यक्रम के आयोजन स्थल पर उठे विवाद पर ममता ने बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल को लेकर उन्होंने पहले ही पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने फेसबुक के जरिए भी अपनी चेतावनी साझा की थी, लेकिन केंद्र ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया. मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यह पूरा आयोजन केंद्र के अधिकार क्षेत्र में था. इसलिए किसी भी कमी के लिए बंगाल सरकार को दोषी ठहराना पूरी तरह गलत है.
प्रधानमंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए ममता ने एक तस्वीर का उदाहरण दिया, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही हैं. तस्वीर में राष्ट्रपति खड़ी हैं और प्रधानमंत्री मोदी बैठे हुए हैं. ममता ने कहा कि जो लोग आदिवासी नेता के सम्मान की दुहाई देते हैं, वे खुद उनका कितना सम्मान करते हैं, यह इस तस्वीर से साफ है. उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रपति का हृदय से सम्मान करते हैं.
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वर्तमान में कोलकाता में एसआईआर के मुद्दे पर टीएमसी के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं, जो अपने तीसरे दिन में है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को रिसीव करने न पहुंच पाने का कारण उनका जनता के अधिकारों के लिए चल रहा संघर्ष है. उन्होंने कहा कि बंगाल पर लगातार हमले हो रहे हैं और उनका वहां बैठना जरूरी है. उनके लिए जनता का हक किसी भी अन्य प्रोटोकॉल से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.
महिला दिवस पर मातृशक्ति के अपमान के आरोपों पर ममता ने दृढ़ता से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी सरकार हमेशा समर्पित रही है. ममता ने कहा कि उन्हें किसी से यह सीखने की आवश्यकता नहीं है कि महिलाओं का सम्मान कैसे किया जाए, क्योंकि वह बचपन से ही इन परंपराओं का पालन कर रही हैं. उन्होंने जोर दिया कि भाजपा केवल राजनीति को प्राथमिकता देती है, जबकि उनकी प्राथमिकता बंगाल की जनता का कल्याण है.