परिसीमन, महिला आरक्षण पर संसद का विशेष सत्र बुला सकती है सरकार, रिजिजू के इंटरव्यू के बाद खड़गे ने पीएम को लिखी चिट्ठी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक और पर्याप्त चर्चा की मांग दोहराई है. किरेन रिजिजू के संकेतों के बाद उन्होंने विशेष संसद सत्र की संभावना पर सरकार से जवाब मांगा.

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Sagar Bhardwaj

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने और राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है. यह मांग ऐसे समय आई है जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में संसद की एक और बैठक बुलाए जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया.

रिजिजू के बयान के बाद पत्र

खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि वह 16 जुलाई 2026 को की गई अपनी पिछली मांग दोहरा रहे हैं. उन्होंने बताया कि रिजिजू ने बुधवार रात एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में संकेत दिया कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. खड़गे ने मानसून सत्र को औपचारिक रूप से स्थगित यानी प्रोरोग न किए जाने का भी उल्लेख किया.

परिसीमन पर चर्चा की मांग

खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि परिसीमन प्रस्तावों पर सभी दलों की बैठक बुलाई जाए और उन्हें विस्तार से समझने का पर्याप्त अवसर मिले. उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण विषय है और सरकार को 16-17 अप्रैल 2026 की तरह प्रस्तावों को जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाना चाहिए.


रिजिजू ने क्या कहा

रिजिजू ने इंटरव्यू में कहा कि संसद बुलाने का फैसला सरकार करती है और राष्ट्रपति से सत्र बुलाने का अनुरोध भी सरकार ही करती है. उन्होंने स्पष्ट रूप से विशेष सत्र की पुष्टि करने से इनकार किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके बयान का मतलब संसद की एक और बैठक की संभावना है, तो उन्होंने कहा कि इसे दोनों तरह से समझा जा सकता है.

पुरानी संसदीय मिसाल का हवाला

रिजिजू ने कहा कि 1952 के बाद कई मौकों पर संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया, लेकिन औपचारिक रूप से प्रोरोग नहीं किया गया और बाद में उसी सत्र को फिर बुलाया गया. उन्होंने इसे कोई नई प्रक्रिया नहीं बताया.

अप्रैल में अटक चुका है बिल

मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से प्रोरोग नहीं किया गया है. विपक्ष इसी वजह से सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार मौजूदा सत्र के जरिए परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को फिर ला सकती है. परिसीमन विधेयक, महिला आरक्षण विधेयक के साथ 131वें संविधान संशोधन के तहत पेश हुआ था, लेकिन अप्रैल में तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था.

कांग्रेस ने रखी तीन शर्तें

खड़गे ने पत्र में कांग्रेस का रुख भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि पार्टी तीन बातों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है-लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रहे, राज्यों के बीच सीटों का वर्तमान आवंटन भी इतनी ही अवधि तक कायम रखा जाए और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाए.