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JNU के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया ने तुर्की को सिखाया सबक, पाकिस्तान की मदद करने पर लिया एक्शन

यह समझौता ज्ञापन मूल रूप से अकादमिक सहयोग, शोध आदान-प्रदान और छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए हस्ताक्षरित किया गया था, जो भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है.

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Reepu Kumari

Jamia Millia Islamia: भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है. ऐसे में जिन देशों ने आतंकिस्तान की मदद की है उन्हें भारी कीमत अदा करनी होगी. ये सख्त संदेश इस वक्त हमारा देश दे रहा है. दोनें दशों के बीच तुर्की ने खुब मजे लिए हैं. अब तुर्की को भी इसका अंजाम भुगतना होगा. देश भर में तुर्की के खिलाफ लोगों में आक्रोश है. यही वजह की अब लोग तुर्की को बायकॉट कर रहे है. तुर्की से आए सामान को भी लोग बायकॉट कर रहे है. कल देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में शुमार जवाहर लाल नेहरु ने तुर्की को तगड़ा झटका दिया. अब 

जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तुर्की के सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने अकादमिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित करने की घोषणा की है. यह निर्णय भारत और तुर्की के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच लिया गया है, खासकर क्षेत्रीय संघर्षों में पाकिस्तान के लिए तुर्की के कथित समर्थन को लेकर. कानपुर विश्वविद्यालय ने तुर्की के इस्तांबुल विश्वविद्यालय के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को भी रद्द कर दिया है.