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'ऐसा लगा कि पूरा पहाड़ ही हम पर गिर रहा है', वायनाड लैंडस्लाइड के पीड़ितों की ये कहानी डरा देगी

वायनाड में भारी बारिश के बीच चार घंटे के भीतर लगातार हुए लैंडस्लाइड ने मुंदक्कई , चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में तबाही मचा दी. घर, पुल, सड़कें और गाड़ियां बह गईं. अब तक 3,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया है और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.

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केरल के वायनाड में तेज बारिश के बाद लैंडस्लाइड हुए. कई जगहों पर हुए लैंडस्लाइड में अब तक 175 लोग मारे गए हैं, जबकि 131 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. अभी भी 220 के लापता होने की रिपोर्ट लिखाई गई है. लैंडस्लाइड सोमवार देर रात 2 बजे और 4 बजे के करीब मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में हुई. इनमें घर, पुल, सड़कें और गाड़ियां बह गईं. रेस्क्यू में आर्मी, एयरफोर्स, NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस लगी हुई है. 

लैंडस्लाइड की घटना को याद करके हुए पीड़ित अभी भी डर से भर जाते हैं. भूस्खलनों के दर्दनाक अनुभव को याद करते हुए जयेश ने आंखों में आंसू भर गया. उन्होंने कहा कि हमें लगा कि पूरा पहाड़ हमारे ऊपर गिर जाएगा. हम उस समय मौत से लड़ रहे थे.150 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है. 

चारों तरफ कीचड़ का ढेर लग गया

आपबीती बताते हुए जयेश ने बताया कि रात 1.30 बजे एक जोरदार आवाज ने उनकी नींद खोल दी और उन्होंने देखा कि दूसरी तरफ के घर नौ पिनों की तरह ढह रहे हैं. जयेश ने बताया कि कुछ ही देर में उनके चारों तरफ कीचड़ का ढेर लग गया, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो गया. उन्होंने कहा, खदान के पास 3-4 घर हैं. हमने सभी को सचेत कर दिया और पानी आने से पहले ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया. लेकिन जल्द ही, चारों ओर कीचड़ हो गया और लोग फंस गए.

परिवार के 9 सदस्य अभी भी लापता

जयेश ने बताया कि उनकी पत्नी के परिवार के 9 सदस्य अभी भी लापता हैं और अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं. दूसरा भूस्खलन जो तीनों में से सबसे घातक था, सुबह 3.30 बजे के आसपास हुआ. उन्होंने कहा इस भूस्खलन में लगभग 200 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए. केवल 4-5 घर ही अब बचे हैं. इनमें से अधिकांश घरों में लोग रह रहे थे.

जयेश, उनकी पत्नी, उनका बेटा और दो अन्य लोग ही अपने इलाके में जीवित बचे हैं. उन्होंने कहा कि तीसरा भूस्खलन सुबह 5.30 बजे के आसपास हुआ... हमारे सारे दस्तावेज नष्ट हो गए. हमें नहीं पता कि क्या करना है. हमें कुछ समझ नहीं आ रहा. कहां जाएं?

मेप्पाडी के एक अन्य जीवित बचे स्टीफन ने कहा कि यह एक आपदा थी जो घटित होने वाली थी, क्योंकि वायनाड में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही थी. उन्होंने कहा, भूस्खलन वाले दिन दोपहर में ज्यादा बारिश नहीं हुई थी. शाम को बारिश शुरू हो गई और किसी भी अधिकारी ने हमारी गली के लोगों को राहत शिविरों में जाने के लिए नहीं कहा.

लगा हेलीकॉप्टर उतरने वाला

पहले भूस्खलन के क्षण को याद करते हुए स्टीफन ने कहा कि ऐसा झटका लगा जैसे हेलीकॉप्टर उतरने वाला हो. इस दुखद घटना से गहरे सदमे में आए स्टीफन ने कहा कि उनकी बहनें और पड़ोसी मारे गए. उन्होंने कहा, मेरे बेटे ने मुझसे कहा कि हमें वहां से चले जाना चाहिए. हमने अपने पड़ोसियों को बुलाया, लेकिन किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि यह इतना बड़ा होगा. कोई नहीं आया. जब हम वहां से निकल रहे थे तो हमें महसूस हो रहा था कि भूस्खलन हमारी ओर आ रहा है. मेरे पड़ोसी पति-पत्नी एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए मृत अवस्था में पड़े थे.

भारी बारिश के बीच चार घंटे के भीतर लगातार हुए भूस्खलन ने मुंदक्कई , चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में तबाही मचा दी है. अब तक 3,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया है और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.