ISRO GSLV Mission: नए साल पर इसरो रचने जा रहा एक और इतिहास, जनवरी में करेगा 100वां प्रक्षेपण

इसरो नए साल पर एक और इतिहास रचने के लिए तैयार है. इसकी जानकारी ISRO के प्रमुख एस. सोमनाथ ने दी है. भारत अपना 100वां प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा करेगा.

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Kamal Kumar Mishra

ISRO GSLV Mission: भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जनवरी 2025 में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है. ISRO के प्रमुख एस. सोमनाथ ने जानकारी दी है कि 100वां प्रक्षेपण जीएसएलवी (Geosynchronous Launch Vehicle) मिशन के जरिए श्रीहरिकोटा से होगा. यह मिशन भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा.

दरअसल,  सोमवार, 30 दिसंबर 2024 को ISRO ने श्रीहरिकोटा से अपना 99वां प्रक्षेपण किया था, जो कि पीएसएलवी-सी60 था. इस मिशन ने दो छोटे उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित किया. इन उपग्रहों का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक को विकसित करना है.

स्पाडेक्स मिशन: नया तकनीकी परीक्षण

इसरो की तरफ से लॉन्च किए गए स्पाडेक्स मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में यानों को जोड़ने (डॉकिंग) और अलग करने (अनडॉकिंग) की प्रक्रिया का परीक्षण करना था. इसे अंतरिक्ष में डॉकिंग की तकनीक को किफायती तरीके से परीक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया था. इस मिशन की सफलता भविष्य में होने वाले जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी. यह ISRO की अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार सुधार की दिशा में एक और कदम है.

2025 में नए मिशनों का आगाज

एस. सोमनाथ ने बताया कि 2025 में ISRO कई नए मिशनों की शुरुआत करेगा. जिनमें से एक महत्वपूर्ण मिशन जनवरी में जीएसएलवी के जरिए होने वाला है, जिसमें नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-02 को कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इससे पहले, मई 2023 में GSLV-F12 रॉकेट के माध्यम से  NVS-01 उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था. यह उपग्रह भारतीय नेविगेशन और मैपिंग क्षमताओं को मजबूत करेगा.

उपग्रहों की सुरक्षित कक्षा और भविष्य की योजनाएं

सोमनाथ ने बताया कि पीएसएलवी-सी60 रॉकेट के प्रक्षेपण का समय 30 दिसंबर को रात 10 बजे तय किया गया था, ताकि यान की कक्षा में पहले से मौजूद अन्य उपग्रहों से टकराव का खतरा न हो. वैज्ञानिकों ने संयोजन अध्ययन (कॉन्जंक्शन स्टडी) के माध्यम से सबसे सुरक्षित समय का चयन किया था.

भारत की अंतरिक्ष में प्रगति

ISRO के प्रमुख ने भविष्य में अधिक जटिल अंतरिक्ष डॉकिंग सिस्टम के विकास की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि स्पाडेक्स जैसे मिशन भारत के अंतरिक्ष सुधारों को और मजबूत करेंगें और आने वाले समय में भारत की अंतरिक्ष तकनीक दुनियाभर में नई ऊंचाइयों को छुएगी. जनवरी में होने वाला 100वां प्रक्षेपण न केवल एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा, बल्कि यह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान की नई सफलता की शुरुआत भी करेगा.