सत्ता परिवर्तन के साथ ही सुधरे भारत-बांग्लादेश संबंध, 18 महीने बाद कोलकाता-ढाका-अगरतला बस सेवा बहाल
करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद कोलकाता-ढाका-अगरतला अंतरराष्ट्रीय बस सेवा मंगलवार को फिर से शुरू हो गई. बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण स्थगित की गई इस सेवा का पुनरुद्धार दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच संचार और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए कोलकाता-अगरतला बस सेवा को मंगलवार से पुनः बहाल कर दिया गया है. बांग्लादेश में पिछले 18 महीनों से जारी राजनीतिक अस्थिरता और उथल-पुथल के कारण इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिवहन सेवा को स्थगित कर दिया गया था. अब पड़ोसी देश में नई सरकार के गठन के साथ ही इस सेवा का फिर से शुरू होना दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
मंगलवार को जब कोलकाता से ढाका होते हुए पहली बस कम से कम 18 यात्रियों को लेकर अगरतला पहुंची, तो त्रिपुरा के परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी ने अखौरा एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) पर स्वयं मौजूद रहकर यात्रियों का स्वागत किया. इसी के साथ दूसरी बस त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के लिए रवाना हुई. यात्रियों ने बताया कि लंबी दूरी के बावजूद यात्रा सुगम रही. हालांकि महानगरों में कुछ मामूली तकनीकी या यातायात संबंधी दिक्कतें आईं, लेकिन कुल मिलाकर पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और संतोषजनक रही.
आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए परिवहन एवं पर्यटन मंत्री सुशांत चौधरी ने कहा कि इस मार्ग के खुलने से केवल परिवहन ही आसान नहीं होगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नई गति मिलेगी. मंत्री ने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबरूम में मैत्री पुल का उपयोग और बांग्लादेशी बंदरगाहों तक सुगम पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने उम्मीद जताई कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और सुगम आवागमन से भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे सीमा पार सहयोग को एक नया आयाम मिलेगा.
लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन
इधर ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने भी द्विपक्षीय संबंधों पर भारत का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश की नई सरकार के साथ अपने ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रबल इच्छा रखता है. वर्मा ने भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि हम एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करने के लिए तैयार हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि मैत्री बस सेवा का यह पुनरुद्धार न केवल वाणिज्यिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होगा.