'पैसे लो किडनी दो,' ट्रांसप्लांट रैकेट बेनकाब! हैरान कर देगी तस्करों की ये कहानी
देश में अंग प्रत्यपर्ण करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. यह गैंग लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करता था. हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों के लोगों को निशाना बनाया जाता था. ये किडनी कॉर्डिनेशन डेस्क में नौकरी करते और बड़ी धांधली में शामिल रहते. भारत में मानव अंगों की तस्करी अपराध है.
दिल्ली पुलिस की ISC क्राइम ब्रांच चाणक्यपुरी टीम ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने ट्रांसप्लांट रैकेट में शामिल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इनके कब्जे से 17 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 9 सिम, लग्जरी कार, लाखों रुपये कैश बरामद किया है. मरीज, डोनर और रिसीवर से जुड़े कई फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं. पुलिस के मुताबिक यह रैकेट, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में सक्रिय था.
पुलिस ने इसके सरगना समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके कब्जे से अधिकारियों के टिकट, मुहर, अस्पतालों के डॉक्यूमेंट, किडनी ट्रांसप्लांट चाहने वाले रोगियों और डोनर्स की फर्जी फाइलें बरामद हुई हैं. क्राइम ब्रांच की इस टीम पर कई दिनों से नजरें थीं.
महिला शिकायतकर्ता ने संदीप और विजय कुमार कश्यप उर्फ सुमित के खिलाफ एक शिकायत दी थी. किडनी प्रत्यारोपण के बहाने उसके पति से 35 लाख की ठगी की गई थी. पुलिस ने केस सामने आने के के बाद एक टीम गठित की. टीम ने 26 जून 2024 को आरोपी सुमित उर्फ विजय को नोएडा से गिरफ्तार किया गया. उसके कब्जे से जाली कागजात, स्टांप सील और मरीज डोनर की फाइलें बरामद की गईं.
उत्तराखंड से हुई गिरफ्तारियां
पुलिस की टीम ने 28 जून को संदीप आर्य और देवेंद्र को उत्तराखंड के एक होटल से गिरफ्तार किया. ये संगठित गिरोह का हिस्सा थे. ये अलग-अलग अस्पतालों में ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर के तौर पर काम करते थे. इन्हें किडनी ट्रांप्लांट की ट्रेनिंग मिली थी. इनका काम किडनी के मरीजों को ढूंढना था. ये दिल्ली, फरीदाबाद, मोहाली, पंचकूला, आगरा और इंदौर के अस्पतालों में मरीज ढूंढते थे.
6 लाख में बिक रही थी किडनी
ये सोशल मीडिया के जरिए डोनर्स की तलाश करते और उन्हें 5 से 6 लाख में किडनी बेचने के लिए कहते. वे दस्तावेजों से फर्जी रिश्तेदार दिखाते थे. ये 11 राज्यों में ऐसा कांड कर चुके थे. इस केस में पुनीत कुमार, हनीफ शेख, चीका, तेज प्रकाश और रोहित खन्ना को भी गिरफ्तार किया है. अब तक ये गैंग, 34 से ज्यादा किडनियां ट्रांसप्लांट कर चुका है.
कौन है मास्टरमाइंड?
इस गैंग का सरगना संदीप आर्य है. वह नोएडा का रहने वाला है. पब्लिक हेल्थ में उसने एमबीए किया है. उसने फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, इंदौर और वडोदरा के विभिन्न अस्पतालों में ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम किया है. वह मरीजों से मिलता था और किडनी की व्यवस्था कराता था. हर किडनी के लिए वह 35 से 40 लाख रुपये लेता था. हर किडनी पर वह 7 से 8 लाख रुपये बचा लेता था.
सोशल मीडिया के जाल से फंसाए जाते थे लोग
लोगों को सोशल मीडिया के जाल से फंसाया जाता था. रोहित खन्ना सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंदों से मिलता और उन्हें किडनी बेचने के लिए ऑफर देता. यह कई सोशल मीडिया पेज का एडमिन था. पुलिस ने इस केस में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया है?
पुलिस को इस केस में अब तक कई आपत्तिजनक दस्तावेज और उपकरण मिले हैं. आइए जानते हैं क्या-क्या इस केस को और संगीन बना रहे हैं.
- अलग-अलग राज्यों के अधिकारियों के 34 स्टैम्प
- किडनी रोगियों और डोनरों की 6 जाली फाइलें
- जाली दस्तावेज
- फेक स्टैंप
- किडनी ट्रांसप्लांट के विवरण वाले 2 लैपटॉप
- 17 मोबाइल फोन
- 9 सिमकार्ड, 1 लाख कैश
- मर्सडीज कार