BMC मेयर का चुनाव टला, मुंबई को अभी नई मेयर के लिए करना होगा इंतजार; जानें क्या है पूरा मामला
सूत्रों के अनुसार, अब मेयर चुनाव फरवरी के पहले सप्ताह में कराया जा सकता है. यह अतिरिक्त समय भाजपा और शिंदे गुट को फैसला लेने का मौका देगा.
मुंबई: देश की सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी में मेयर पद की जंग अचानक अटक गई है. 31 जनवरी को होने वाला चुनाव आखिरी वक्त पर टाल दिया गया, क्योंकि सत्ताधारी पार्टियां अपने-अपने पार्षदों और ग्रुप्स का पंजीकरण पूरा नहीं कर पाई. औपचारिक प्रक्रिया रुकते ही सियासी अटकलें तेज हो गई हैं.
बीएमसी प्रशासन ने मेयर पद के लिए आरक्षण घोषित कर 31 जनवरी को मतदान कराने की तैयारी कर ली थी. लेकिन नियम के मुताबिक, सभी दलों और गुटों का पंजीकरण अनिवार्य है. भाजपा और शिंदे गुट यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके. जब तक नगर सचिव कार्यालय में सभी प्रमाणपत्र जमा नहीं होते, तब तक चुनाव कराना संभव नहीं है.
यूबीटी और मनसे की तैयारी तेज
इस देरी के बीच शिवसेना यूबीटी और मनसे ने तेजी दिखाई. दोनों दलों ने मिलकर अपने 65 पार्षदों का पंजीकरण समय पर पूरा कर लिया. इससे वे औपचारिक रूप से चुनाव के लिए तैयार हो गए हैं. उनकी तत्परता ने प्रतिद्वंद्वी खेमे पर दबाव बढ़ा दिया है और राजनीतिक बढ़त का संकेत भी दिया है.
फरवरी में मतदान की संभावना
सूत्रों के अनुसार, अब मेयर चुनाव फरवरी के पहले सप्ताह में कराया जा सकता है. यह अतिरिक्त समय भाजपा और शिंदे गुट को फैसला लेने का मौका देगा. सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों मिलकर संयुक्त गुट बनाएंगे या अलग-अलग पंजीकरण कराएंगे. इसी निर्णय से 227 सदस्यीय सदन में मेयर की कुर्सी का भविष्य तय होगा.
बीएमसी की सत्ता और बड़ा दांव
करीब 60 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली बीएमसी में सत्ता का महत्व बेहद बड़ा है. हालिया नगर निकाय चुनावों में महायुति ने 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया. भाजपा को 89 और शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं. यह उद्धव ठाकरे परिवार के तीन दशक पुराने वर्चस्व का अंत माना जा रहा है.
उद्धव ठाकरे का तीखा संदेश
इसी बीच उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधा हमला बोला है. बालासाहेब ठाकरे की जयंती पर उन्होंने कहा कि शिवसेना केवल पार्टी नहीं बल्कि विचारधारा है. उन्होंने दावा किया कि मुंबई की मिट्टी से जुड़ी यह सोच कभी खत्म नहीं हो सकती. उनका यह बयान बीएमसी की सियासी लड़ाई को और तेज करता दिख रहा है.