'आज के भारत की सच्चाई', एआर रहमान के सांप्रदायिकता वाले बयान का महबूबा मुफ्ती ने किया सपोर्ट

एआर रहमान के बॉलीवुड में कथित बढ़ते सांप्रदायिक माहौल वाले बयान पर नई बहस छिड़ गई है. महबूबा मुफ्ती ने उनका समर्थन किया, जबकि जावेद अख्तर ने इस सोच से असहमति जताई है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: प्रसिद्ध संगीतकार एआर रहमान के उस बयान ने एक बार फिर देशव्यापी बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हाल के वर्षों में उन्हें कम काम मिलने की एक वजह 'सांप्रदायिक सोच' भी हो सकती है. इस टिप्पणी पर फिल्म जगत और राजनीति से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. गीतकार जावेद अख्तर के बयान के बाद अब जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने खुलकर रहमान का समर्थन किया है.

रहमान के बयान से शुरू हुई बहस

एआर रहमान ने BBC एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बीते कुछ वर्षों में सत्ता का संतुलन बदला है. उनके अनुसार, अब कई अहम फैसले ऐसे लोग ले रहे हैं, जो रचनात्मक नहीं हैं. रहमान ने यह भी कहा कि उन्हें सीधे तौर पर नहीं, बल्कि परोक्ष रूप से यह संकेत मिला कि काम न मिलने के पीछे 'कोई सांप्रदायिक कारण' भी हो सकता है.

जावेद अख्तर की असहमति

रहमान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए जावेद अख्तर ने इस विचार को खारिज किया. उनका कहना था कि रहमान इतने बड़े संगीतकार हैं कि लोग उनसे संपर्क करने में हिचकते हैं. अख्तर के मुताबिक, यह डर सम्मान और उनकी ऊंची हैसियत से जुड़ा है, न कि किसी पूर्वाग्रह से. उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि वे रहमान जैसे बड़े नाम को संभाल नहीं पाएंगे.

महबूबा मुफ्ती का समर्थन

जावेद अख्तर की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि रहमान की चिंता को नकारना भारतीय मुसलमानों के वास्तविक अनुभवों को अनदेखा करना है. उन्होंने शबाना आजमी के उस पुराने अनुभव का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मुस्लिम होने के कारण घर न मिलने की बात कही थी. महबूबा ने कहा कि बॉलीवुड हमेशा समाज की सच्चाइयों का प्रतिबिंब रहा है.

बॉलीवुड से तीखी प्रतिक्रियाएं

इस विवाद में अन्य फिल्मी हस्तियां भी कूद पड़ी हैं. अभिनेत्री और नेता कंगना रनौत ने रहमान की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में किसी को इतना 'पूर्वाग्रही और नकारात्मक' नहीं देखा. उनके बयान ने बहस को और तेज कर दिया, जिससे यह मुद्दा केवल सिनेमा तक सीमित न रहकर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया.

'छावा' और विभाजन की बात

रहमान ने इंटरव्यू में 2025 की बड़ी हिट फिल्म 'छावा' का भी जिक्र किया, जिसके लिए उन्होंने संगीत दिया था. उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक खास भावना को भुनाने वाली थी और समाज में पहले से मौजूद विभाजन को दर्शाती है. उनका मानना है कि कला और सिनेमा, दोनों ही देश की बदलती सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हैं, चाहे वे असहज क्यों न हों.