'सभी पायलटों के सालाना डोप टेस्ट पर विचार', फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस के बाद एक्शन मोड में सरकार

एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना और पायलट के मारिजुआना टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद सरकार पायलटों की जांच के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है. प्रस्ताव के तहत सभी एयरलाइन पायलटों का साल में एक बार डोप टेस्ट कराया जा सकता है.

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Shanu Sharma

एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई टर्बुलेंस की घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे हैं. इसी बीच सरकार एयरलाइन पायलटों के डोप टेस्ट के मौजूदा नियमों को और सख्त करने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, नागर विमानन महानिदेशालय संबंधित पक्षों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है.

वर्तमान नियमों के तहत एयरलाइन के केवल 10 प्रतिशत पायलटों का डोप टेस्ट कराया जाता है. सरकार अब सभी पायलटों की साल में एक बार जांच कराने की संभावना पर विचार कर रही है.

रैंडम समय पर हो सकती है जांच

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि सरकार चाहती है कि पायलटों की जांच सिर्फ तय प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि उनका परीक्षण अचानक और रैंडम समय पर भी किया जा सके. हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सुरक्षा के साथ-साथ विमानन कंपनियों के कामकाज पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा. डीजीसीए फिलहाल 100 प्रतिशत पायलट टेस्टिंग की व्यावहारिकता और इससे जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा कर रहा है. संबंधित पक्षों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं.


फुकेत फ्लाइट के कमांडर का टेस्ट आया पॉजिटिव

यह प्रस्ताव एयर इंडिया की उड़ान AI2379 से जुड़ी घटना के कुछ दिन बाद सामने आया है. 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही इस फ्लाइट में उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई में बदलाव हुआ था. एयरबस A320 विमान में 137 लोग सवार थे, जिनमें तीन बच्चे और आठ चालक दल के सदस्य शामिल थे.

घटना के बाद विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया, लेकिन 20 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई. दोनों पायलटों का अनिवार्य नशीले पदार्थों से जुड़ा परीक्षण कराया गया. सूत्रों के अनुसार, विमान के कमांडर के नमूने की दोबारा पुष्टि कराने के लिए उसे निर्धारित प्रयोगशाला भेजा गया, जहां मारिजुआना के लिए जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई.

घटना के बाद एयर इंडिया ने भी अपने सभी पायलटों की अनिवार्य स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया है. इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं कोई पायलट प्रतिबंधित पदार्थ या ऐसी दवाओं का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा, जिनका उड़ान संचालन पर असर पड़ सकता है.