क्यों रणबीर कपूर ने पहले ठुकरा दी थी 'रामायण'? भगवान राम का रोल निभाने से क्यों डर रहे थे एक्टर
बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर ने खुलासा किया कि उन्होंने शुरुआत में रामायण फिल्म को करने से मना कर दिया था. बाद में पिता बनने और बेटी राहा की वजह से उनका फैसला बदल गया.
मुंबई: बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर, नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा इन दिनों लॉस एंजिल्स में फिल्म रामायण के प्रमोशन में लगे हुए हैं. इस दौरान फिल्म की पहली झलक रामा को IMAX स्क्रीन पर दिखाया गया. मीडिया और फैंस के बीच इस खास प्रेजेंटेशन में फिल्म के विजन और भावनात्मक पहलुओं पर खुलकर चर्चा हुई. रणबीर कपूर ने इस मौके पर अपने किरदार और फिल्म से जुड़ी कई अहम बातें साझा कीं.
रणबीर कपूर ने खुलासा किया कि जब उन्हें करीब चार साल पहले यह फिल्म ऑफर हुई थी, तो उन्होंने तुरंत मना कर दिया था. उनका मानना था कि वह इस किरदार के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि वह इतने बड़े और पवित्र किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे. श्री राम जैसे आदर्श और मर्यादा पुरुषोत्तम का किरदार निभाना उनके लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी, जिसे लेकर वह खुद को पर्याप्त नहीं मानते थे.
किरदार के लिए चाहिए था आत्मिक जुड़ाव
रणबीर ने यह भी बताया कि रामायण सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा है. उन्होंने कहा कि इस किरदार की तैयारी केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और आत्मिक स्तर पर भी करनी होती है. उनके अनुसार, इस किरदार को निभाने के लिए सच्चाई और समझ सबसे जरूरी है. जब तक कोई इस भावना को महसूस नहीं करता, तब तक वह इसे सही तरीके से पर्दे पर नहीं ला सकता.
बेटी राहा बनीं बदलाव की वजह
रणबीर कपूर के फैसले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह पिता बने. उनकी बेटी राहा के जन्म ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया. रणबीर ने बताया कि पिता बनने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी और जीवनशैली को लेकर नए नजरिए की जरूरत महसूस हुई. उन्होंने कहा कि श्री राम का किरदार निभाना और पिता बनना दोनों ही उनके जीवन के अहम मोड़ साबित हुए. यही वजह थी कि उन्होंने अपने डर को पीछे छोड़कर इस फिल्म को साइन करने का फैसला किया.
रणबीर ने यह भी कहा कि भगवान राम का प्रभाव सदियों से लोगों के दिलों में है. उन्होंने बताया कि जब कोई इस कहानी को दिल से समझता है, तो सब कुछ अपने आप सही हो जाता है. रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका सिखाने वाला ग्रंथ है, और इसे पर्दे पर उतारना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है.