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Pankaj Udhas Birth Anniversary: हर शो से पहले क्यों हनुमान चालीसा पढ़ते थे पंकज उधास, सुरीली आवाज से बने गजल के किंग

Pankaj Udhas Birth Anniversary: बॉलीवुड और गजल के दिग्गज सिंगर पंकज उधास की आज, 17 मई 2025 की जन्मतिथि है. 1951 में गुजरात के जेतपुर में जन्मे पंकज ने अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर में लाखों दिल जीते. ‘चिट्ठी आई है’, ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’ जैसे गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं.

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Babli Rautela

Pankaj Udhas Birth Anniversary: आज, 17 मई 2025, बॉलीवुड और गजल के दिग्गज सिंगर पंकज उधास की जन्मतिथि है. 1951 में गुजरात के जेतपुर में जन्मे पंकज ने अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर में लाखों दिल जीते. ‘चिट्ठी आई है’, ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’ जैसे गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं. 26 फरवरी 2024 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी संगीत विरासत आज भी जिंदा है.

पंकज उधास हर स्टेज शो और रिकॉर्डिंग से पहले हनुमान चालीसा पढ़ते थे. यह उनकी आध्यात्मिक आस्था और अनुशासन को दर्शाता है. गुजरात के छोटे से गांव नवगढ़ से शुरू हुआ उनका सफर मुंबई के संगीत मंचों तक पहुंचा. उन्होंने सर भावसिंहजी पॉलिटेक्निक, भावनगर और फिर मुंबई के विल्सन व सेंट जेवियर्स कॉलेज से विज्ञान में स्नातक किया.

पंकज ने कैसे की संगीत की शुरुआत

पंकज के बड़े भाई मनहर उधास, एक मशहूर स्टेज परफॉर्मर, उनके पहले प्रेरक थे. चीन-भारत युद्ध के दौरान पंकज ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाकर पहला स्टेज प्रदर्शन किया, जहां उन्हें 51 रुपये इनाम मिले. मुंबई में वीणा वादक अब्दुल करीम खान और गुलाम कादिर खान से संगीत सीखा. बाद में ग्वालियर घराने के मास्टर नवरंग नागपुरकर ने उन्हें शास्त्रीय गायन सिखाया. 1970 में किशोर कुमार के साथ ‘मुन्ने की अम्मा’ से करियर शुरू किया, लेकिन 1986 की फिल्म ‘नाम’ के गाने ‘चिट्ठी आई है’ ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया.

गजल में पंकज उदास ने बनाई पहचान

पंकज को गजलों से गहरा लगाव था. इसके लिए उन्होंने उर्दू सीखी और 1980 में पहली गजल एल्बम ‘आहट’ रिलीज की. ‘मुकर्रर’, ‘तरन्नुम’, ‘नशा’ जैसे 50 से ज्यादा एल्बम ने उन्हें गजल सम्राट बनाया. कनाडा और अमेरिका में 10 महीने के गजल शो ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया. 1987 में उनका एल्बम ‘शगुफ्ता’ भारत में पहला सीडी एल्बम था.

पंकज ने 70 से ज्यादा फिल्मों में गाने गाए. ‘घायल’ में लता मंगेशकर के साथ ‘माहिया तेरी कसम’ और ‘मोहरा’ में साधना सरगम के साथ ‘ना कजरे की धार’ जैसे गाने सुपरहिट रहे. ‘नाम’, ‘साजन’, ‘ये दिल्लगी’ में उन्होंने ऑन-स्क्रीन परफॉर्म भी किया. 1986 में ‘नाम’ में अभिनय कर उन्होंने दर्शकों का दिल जीता.