Nana Patekar: क्यों नाना पाटेकर को नहीं मिलते अवॉर्ड्स? कैसे की फिल्मों में शुरुआत
नाना पाटेकर का करियर सभी के लिए प्रेरणादायक है. उनकी मेहनत, लगन और सच्चाई ने उन्हें भारतीय सिनेमा का एक मजबूत स्तंभ बना दिया है. आज उनके जन्मदिन पर उनकी उस कहानी को जानेंगें जो उनके लाखों फैंस के लिए एक प्रेरणा है.
Nana Patekar Birthday: नाना पाटेकर, भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा सितारों में से एक हैं, जिनके अभिनय ने दर्शकों को बार-बार प्रभावित किया है. 1 जनवरी 1951 को मुंबई में जन्मे नाना पाटेकर ने मराठी थिएटर से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों की दुनिया में कदम रखा. 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', और 'अग्निपथ' जैसी फिल्मों में उनके दमदार प्रदर्शन ने उन्हें खास पहचान दिलाई.
नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह स्मिता पाटिल की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में आए. उन्होंने कहा, 'स्मिता मेरा हाथ पकड़कर मुझे फिल्मों में लेकर आई थीं.' थिएटर से शुरूआत करने वाले नाना को फिल्मों में जाने का उत्साह थिएटर की वजह से ही मिला. उनकी पहली फिल्म में संगीतकार श्रीरामचंद्र अभिनय कर रहे थे. इस दौरान नाना ने अपने अभिनय के लिए खास तैयारी की.
कैसी स्क्रिप्ट पसंद करते हैं नाना पाटेकर
नाना पाटेकर हमेशा स्क्रिप्ट का चुनाव आम नागरिक के नजरिये से करते हैं. उन्होंने बताया, 'मैं स्क्रिप्ट को सुनता हूं और कहानी में पूरी तरह शामिल हो जाता हूं. कई बार मैं स्क्रिप्ट लिखने की प्रक्रिया में भी हिस्सा लेता हूं, ताकि कहानी को बेहतर तरीके से पेश किया जा सके. जब एक किरदार को निभाता हूं, तो 6-8 महीने तक उसी किरदार में रहता हूं. ऐसा लगता है, जैसे किरदार मेरे अंदर बस गया हो.'
अवॉर्ड्स को लेकर क्या सोचते हैं नाना?
अवॉर्ड शोज पर बात करते हुए नाना ने कहा, 'मुझे अवॉर्ड नहीं मिलते क्योंकि जूरी में तीन-चार लोग ऐसे होते हैं जिनसे मेरा झगड़ा होता है. लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. थिएटर में मेरी ट्रेनिंग हुई है और मैंने अपने दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई है. तारीफें और पैसे दोनों मुझे मेरी मेहनत से मिले हैं.'
जब नाना से पूछा गया कि वह किसके साथ आगे काम करना चाहते हैं, तो उन्होंने आमिर खान का नाम लिया. उन्होंने कहा, 'मैं आमिर खान के साथ काम करना चाहता हूं. उनकी कहानी कहने का तरीका मुझे बहुत पसंद है.' साथ ही, उन्होंने अनिल शर्मा की तारीफ करते हुए कहा कि वह छोटी से छोटी चीज को भी बड़े रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं.
50 साल का अभिनय सफर
नाना पाटेकर ने थिएटर से लेकर हिंदी सिनेमा तक अपने 50 साल के करियर में हर किरदार को जीवंत किया है. उनकी फिल्मों और अभिनय में गहराई उनकी थिएटर का नतीजा है. उनके अभिनय का जुनून और समाज से जुड़ाव उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाता है.