ट्रंप की चेतावनी से निवेशकों के डूबे 5 लाख करोड़! सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, जानें मंगलवार को मार्केट में अमंगल होने की बड़ी वजहें
24 फरवरी को सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक और निफ्टी 288 अंक गिरकर 25,450 के नीचे आ गया. आईटी और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली, ट्रंप की टैरिफ चेतावनी, अमेरिका-ईरान तनाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेतों से बाजार में 4.96 लाख करोड़ का नुकसान हुआ.
मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखी गई. सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूटकर 82,277 के निचले स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 288 अंक लुढ़ककर 25,450 से नीचे चला गया. आईटी और ऑटो सेक्टर की भारी बिकवाली ने निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया.
कुल मिलाकर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 4.96 लाख करोड़ रुपये घटकर 464 लाख करोड़ रह गया. ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों में डर पैदा किया है.
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी से अनिश्चितता
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया था, लेकिन अब प्रशासन सेक्शन 232 के तहत नए टैरिफ लगाने की तैयारी में है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का साथ देने वाले देशों पर ज्यादा ड्यूटी लग सकती है. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन आज होने से वैश्विक बाजार सतर्क हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेड पॉलिसी पर उनका संदेश बाजार की दिशा तय करेगा.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
ईरान में विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई से स्थिति तनावपूर्ण है. अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई है. वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु वार्ता 26 फरवरी को प्रस्तावित है. भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने से निवेशक सतर्क हो गए हैं. मिडिल ईस्ट में अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतें भी प्रभावित हो रही हैं, जिसका असर रुपये और बाजार पर पड़ रहा है.
आईटी शेयरों में तेज बिकवाली
आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.84 प्रतिशत गिरा. वजह है ग्लोबल एआई टूल्स से पुराने सॉफ्टवेयर अपग्रेड की लागत कम होने की आशंका. एन्थ्रोपिक के क्लॉड कोड टूल्स के दावों से आईटी कंपनियों के भविष्य के ऑर्डर पर सवाल उठे. इससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की और सेक्टर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बना.
रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेत
रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 90.96 पर पहुंच गया. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत डॉलर इसका कारण हैं. एशियाई बाजार सुस्त रहे, जबकि वॉल स्ट्रीट रात भर गिरावट के साथ बंद हुआ. एफआईआई की खरीदारी से रुपये को और ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. कुल मिलाकर वैश्विक और घरेलू कारकों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा.