रिन्यूएबल एनर्जी की नई बादशाह बनेगी सुजलोन? कंपनी ने 5 साल का तगड़ा प्लान किया तैयार

सुजलॉन एनर्जी ने 'सुजलॉन 2.0' रणनीति के तहत विंड, सोलर, बैटरी स्टोरेज और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट को मिलाकर एक 'फुल-स्टैक' रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनने और वित्त वर्ष 2031 तक 70 GW एसेट मैनेजमेंट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: बिजली बनाने वाली पवन चक्कियों के लिए मशहूर सुजलॉन कंपनी अब एक ऐसा बड़ा धमाका करने जा रही है जो देश के क्लीन एनर्जी सेक्टर की तस्वीर बदल देगा. कंपनी ने खुद को पूरी तरह बदलने के लिए एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है कि अब वह सिर्फ हवा से ही नहीं बल्कि हर तरीके से देश को रोशन करेगी. 

भारत की दिग्गज रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी सुजलॉन ने 'सुजलॉन 2.0' नाम से एक बेहद महत्वाकांक्षी ट्रांसफॉर्मेशन प्लान का एलान किया है. इस नई रणनीति के तहत कंपनी सिर्फ विंड टरबाइन बनाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि सोलर एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज जैसे हर क्षेत्र में कदम रखकर एक 'फुल-स्टैक' यानी ऑल-इन-वन रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस प्रदाता बनेगी.

2031 के लिए तय किए बड़े लक्ष्य

कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 के लिए कुछ बेहद बड़े और कड़े लक्ष्य तय किए हैं/ सुजलॉन का इरादा अपनी सालाना रिन्यूएबल एनर्जी सेल्स को बढ़ाकर 10 गीगावॉट करने, अपनी ऑर्डर बुक को 15 गीगावॉट तक पहुंचाने और अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट को बढ़ाकर 70 गीगावॉट तक ले जाने का है. अगर कंपनी इन लक्ष्यों को हासिल कर लेती है तो यह भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक होगी.

हालांकि विंड एनर्जी कंपनी का मुख्य बिजनेस बनी रहेगी और सुजलॉन इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए वैश्विक स्तर पर भी अपना विस्तार करेगी. भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी S175 यानी 5 मेगावाट और S163 यानी 6.3 मेगावाट जैसे अगली पीढ़ी के दमदार विंड टरबाइन मॉडल्स भी तैयार कर रही है.

सोलर एनर्जी में एंट्री करेगी कंपनी

इसके साथ ही सुजलॉन पहली बार सोलर एनर्जी के बाजार में भी एक बड़ा दांव खेलने जा रही है. लेकिन खास बात यह है कि कंपनी सोलर पैनल बनाने की फैक्ट्रियां लगाने पर भारी-भरकम पैसा खर्च नहीं करेगी. इसके बजाय, वह दूसरी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके सोलर प्रोजेक्ट्स विकसित करेगी. इस 'एसेट-लाइट' अप्रोच से कंपनी का पैसा भी बचेगा और काम भी तेजी से होगा.

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर भी लगाएगी दांव

सुजलॉन 2.0 का एक और अहम हिस्सा है 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' में एंट्री. कंपनी साल 2027 तक एक बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की योजना बना रही है जो ग्रिड को स्थिरता देने और बिजली की सप्लाई को भरोसेमंद बनाने में मदद करेगी. इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण और सरकारी मंजूरियों को आसान बनाने के लिए कंपनी 'RE DevCo' नाम का एक नया प्लेटफॉर्म भी ला रही है. कुल मिलाकर, सुजलॉन 2.0 के जरिए कंपनी भारत की बढ़ती हुई क्लीन एनर्जी की मांग को पूरा करने के लिए खुद को एक नए और बेहद मजबूत अवतार में पेश कर रही है.