चीनी के दाम क्यों बढ़े? ISMA ने बताया असली कारण, इथेनॉल पर उठ रहे सवालों का भी दिया जवाब
देश में चीनी की कीमतों में करीब 16 फीसदी तेजी आई है. ISMA के मुताबिक इसकी वजह इथेनॉल नहीं, बल्कि मौसम, कम गन्ना उत्पादन, बढ़ती मांग, ब्राजील की कम आपूर्ति और जमाखोरी है.
त्योहारी मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट की चिंता बढ़ा दी है. खुदरा बाजार में इसका भाव 60-65 रुपये किलो या उससे ऊपर पहुंचने की बात कही जा रही है. इसी बीच चीनी उद्योग के संगठन ISMA ने कीमतों में तेजी की असली वजहों को लेकर अपना पक्ष रखा है.
चीनी की कीमतों में क्यों आया उछाल?
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. इसके बावजूद कीमतों में लगभग 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
उन्होंने कहा कि इस तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से गन्ने का उत्पादन प्रभावित हुआ, जबकि महाराष्ट्र में गन्ने की अधिक क्रशिंग दर और उत्तर प्रदेश में गन्ने की कुछ किस्मों से जुड़ी समस्याओं ने भी उत्पादन पर असर डाला. इसके अलावा त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव आया है.
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ब्राजील की कम आपूर्ति और बढ़ी मांग
चीनी की कीमतों में तेजी का असर केवल घरेलू उत्पादन से नहीं जुड़ा है. ISMA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्राजील की ओर से आपूर्ति कम होने का भी प्रभाव पड़ा है. त्योहारों से पहले भारत में चीनी की मांग बढ़ने के कारण बाजार में खरीदारी तेज हुई, जबकि वैश्विक स्तर पर उपलब्धता से जुड़े संकेतों ने कीमतों को और सहारा दिया.
ऐसे माहौल में थोक खरीदारों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हो गईं. ISMA ने दावा किया है कि कुछ बड़े खरीदारों ने चीनी का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में उपलब्ध मात्रा कम दिखाई देने लगी. संगठन के अनुसार, इसी वजह से आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला.
ISMA ने बताया इथेनॉल जिम्मेदार नहीं
चीनी की महंगाई के बीच इथेनॉल का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है. विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए कि गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ने के कारण चीनी का उत्पादन और बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई, जिससे दाम बढ़े. हालांकि, ISMA अध्यक्ष ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा मूल्य वृद्धि के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए.
केंद्र सरकार भी पहले इन आरोपों को खारिज कर चुकी है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और इथेनॉल उत्पादन को मौजूदा कीमतों में तेजी का कारण बताना सही नहीं है. सरकार का कहना है कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
मौसम और बीमारी से भी उत्पादन पर असर
सरकार की ओर से चीनी की कीमतों पर बात करते हुए उत्पादन में कमी के लिए रेड रॉट बीमारी और अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है. इन कारणों से गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की बात कही गई है, जिसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है.
ISMA ने भी मौसम को कीमतों में तेजी के प्रमुख कारणों में शामिल किया है. फिलहाल उद्योग संगठन का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है, लेकिन मांग, उत्पादन और बाजार में उपलब्ध स्टॉक के बीच संतुलन बिगड़ने से कीमतें ऊपर गई हैं. अगर त्योहारों के दौरान मांग बनी रहती है और थोक स्तर पर जमाखोरी जैसी गतिविधियां जारी रहती हैं, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. ऐसे में सरकार और चीनी उद्योग की नजर बाजार की आपूर्ति पर बनी हुई है.