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Share Market: साल के आखिरी दिन बिगाड़ा बाजार का मूड, खुलते ही बिखरे सेंसेक्स-निफ्टी 

सेंसेक्स में लिस्टेड 30 कंपनियों में से कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. इनमें टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, जोमैटो, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई.

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Gyanendra Sharma

विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी की निकासी और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझान के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई. बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ही प्रारंभिक कारोबार में नकारात्मक रुख दिखाते हुए नीचे आए. बीएसई सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में 468.14 अंकों की गिरावट के साथ 77,779.99 अंक का स्तर छुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 117.05 अंक गिरकर 23,527.85 अंक पर आ गया. सुबह 10:25 बजे तक सेंसेक्स में और गिरावट आई और यह 602 अंकों की गिरावट के साथ 77,645 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. 

सेंसेक्स में लिस्टेड 30 कंपनियों में से कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. इनमें टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, जोमैटो, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई. इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों के विश्वास में कमी का परिणाम हो सकती है.

3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

हालांकि, कुछ कंपनियों के शेयरों में बढ़त भी देखने को मिली. कोटक महिंद्रा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), टाटा मोटर्स और टाटा स्टील के शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई. इन कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार में कुछ स्थिरता आई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार नकारात्मक दिशा में बना रहा. साल के आखिरी सेशन में भी निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. 

वैश्विक बाजार का हाल

वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी रही, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश करने की आकर्षण में कमी आई. इसके परिणामस्वरूप, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अपने निवेशों को निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी. 

इस गिरावट के बावजूद, बाजार के जानकारों का मानना है कि यह एक अस्थायी स्थिति हो सकती है और आने वाले दिनों में बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है, खासकर यदि वैश्विक स्तर पर स्थिति बेहतर होती है और विदेशी निवेशकों का विश्वास फिर बहाल होता है.