भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर इस महीने के अंत में होंगे हस्ताक्षर: अमेरिकी राजदूत
अमेरिकी राजदूत ने बताया कि इसी महीने भारत का एक प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन जाएगा. दोनों देशों के बीच फरवरी में हुए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए यह यात्रा अहम मानी जा रही है.
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को खुलासा किया कि इसी महीने के अंत में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन का दौरा करेगा. उन्होंने एक्स पर लिखा कि उनकी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ बेहद रचनात्मक बातचीत हुई है. इस बातचीत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण और मध्य एशिया में व्यापार संबंधी प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई. फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिसे अब मूर्त रूप दिया जाना है.
प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होंगी वित्त मंत्री
इस प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी शामिल किया गया था, लेकिन अब वह यह यात्रा नहीं करेंगी. दरअसल, संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर अहम पेशकश होनी है. सीतारमण लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़े बिलों को पेश करने की प्रक्रिया में शामिल होंगी. ऐसे में उनकी जगह कोई और वरिष्ठ अधिकारी इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकता है.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह शिष्टमंडल किस स्तर का होगा, लेकिन राजदूत गोर ने इसे लेकर काफी उत्साह जताया है. भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता काफी लंबी बातचीत के बाद तय हुआ था, और अब इस पर दस्तखत करने की तैयारी है. विपक्ष ने हालांकि इस समझौते की कुछ शर्तों पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद बता रही है.
समझौते से भारत को कैसे होगा फायदा
इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को 50 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है. यानी भारतीय उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में काफी सस्ते पड़ेंगे. वहीं, भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने का वादा किया है.
इनमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उसके पुर्जे, धातु, कोयला और टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीजें शामिल हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया था. इस डील से भारतीय कंपनियों को अमेरिका में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा, वहीं अमेरिका को भारत जैसे बड़े बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री का भरोसा मिला है.
रूसी तेल को लेकर क्या है समझौता
व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक फैक्ट शीट के मुताबिक, इस समझौते की एक अहम शर्त यह भी है कि भारत रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीदारी बंद कर देगा. हालांकि इसमें एक अपवाद भी दिया गया है. ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से भारत को कुछ खास रूसी तेल की खरीद की ‘इजाजत’ दी गई है. लेकिन अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन सीमित खरीद से मॉस्को को कोई खास आर्थिक फायदा नहीं होगा.
यह शर्त भारत के लिए काफी नाजुक है, क्योंकि भारत लंबे समय से रूस का बड़ा तेल खरीदार रहा है. लेकिन अमेरिका के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों को देखते हुए भारत सरकार ने यह समझौता किया है. विपक्ष का आरोप है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा होगा, लेकिन सरकार का कहना है कि नई डील से देश की जरूरतें पूरी होंगी और नई तकनीक भी मिलेगी.
कब लागू होगा समझौता
अब सबकी नजर इस महीने के आखिर में होने वाली वाशिंगटन यात्रा पर टिकी है. माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद समझौते पर औपचारिक रूप से दस्तखत हो सकते हैं. हालांकि अमेरिकी राजदूत ने कोई तारीख नहीं बताई है, लेकिन ‘इसी महीने’ कहकर उन्होंने संकेत दे दिया है कि बातचीत अंतिम चरण में है.
इससे पहले फरवरी में हुई घोषणा के बाद से ही उद्योग जगत इस समझौते का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. अब अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का नया अध्याय शुरू हो जाएगा. यह देखना भी दिलचस्प होगा कि सीतारमण की गैरमौजूदगी में कौन सा बड़ा नेता या अधिकारी इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करता है, क्योंकि उससे समझौते की गंभीरता का अंदाजा लगेगा.