होली पर फ्लाइट से घर जाना हुआ सपना! किराए में 185% तक का भारी उछाल; सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
होली के त्योहार से पहले प्रमुख रूटों पर हवाई किराए आसमान छू रहे हैं. ट्रेनों में जगह न होने और फ्लाइट्स के किराए में 185 प्रतिशत तक की वृद्धि ने प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल दिया है.
नई दिल्ली: रंगों का त्योहार होली करीब है, लेकिन अपनों के बीच पहुंचने की डगर इस बार बेहद महंगी साबित हो रही है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल लौटने वाले प्रवासियों के लिए हवाई सफर अब किसी 'लक्जरी' से कम नहीं रह गया है. 28 फरवरी (शनिवार) को होली से ऐन पहले के वीकेंड पर कई प्रमुख रूटों पर विमानों का किराया सामान्य से तीन गुना तक बढ़ चुका है. ट्रेनों में पहले ही 'नो रूम' की स्थिति है, जिससे हवाई कंपनियां डायनामिक प्राइसिंग के जरिए आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल रही हैं.
आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली से गोरखपुर जाने वाली फ्लाइट का किराया, जो मार्च के अंत में करीब 2,999 रुपये रहता है, 28 फरवरी के लिए 8,563 रुपये तक पहुंच गया है, यानी सीधे तौर पर 185 प्रतिशत का अंतर. इसी तरह बेंगलुरु-गोरखपुर रूट पर किराया 19,589 रुपये (प्लस टैक्स) के पार है. दिल्ली से पटना और गया के लिए भी यात्रियों को 11,000 से 12,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि ऑफ-सीजन में यह महज 4,500 रुपये के करीब होता है. मुंबई से प्रयागराज के टिकट में भी 146 प्रतिशत का उछाल देखा गया है.
सुप्रीम कोर्ट सख्त: सरकार से मांगा हलफनामा
बढ़ते हवाई किराए के इस गंभीर मुद्दे पर अब न्यायपालिका ने भी संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने टिकटों की तेजी से बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है. एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. हालांकि, अगली सुनवाई 23 मार्च को होनी है, तब तक होली का त्योहार बीत चुका होगा, जिससे फिलहाल यात्रियों को डायनामिक फेयर से तत्काल राहत मिलने के आसार कम ही हैं.
क्या है इस उछाल की वजह?
विमानन कंपनियां 'डायनामिक प्राइसिंग' का सहारा लेती हैं, जहां सीटों की मांग बढ़ने के साथ-साथ कीमतें भी बढ़ती जाती हैं. उत्तर भारत के छोटे शहरों के लिए सीमित नॉन-स्टॉप फ्लाइट्स होने के कारण दबाव और बढ़ जाता है. हालांकि डीजीसीए (DGCA) किराए के ट्रेंड की समीक्षा कर रहा है, लेकिन फिलहाल शुरुआती बुकिंग ही इस महंगे सौदे से बचने का एकमात्र विकल्प नजर आ रही है.
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