चांदी का लुढ़का पारा, जानें क्या है मार्केट में सोना का हाल? यहां करें चेक
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी के दामों में गिरावट देखनो को मिली है. निवेशक अभी सही समय का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि ऐसा क्यों हो रहा है, इस बात को आप यहां समझ सकते हैं.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली. शाम पांच बजे बाजार खुलते ही चांदी पर भारी दबाव दिखा और यह 15,000 रुपये तक लुढ़क गई.
मार्केट में रात करीब 10.45 बजे चांदी 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 2,20,650 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी. वहीं सोना भी 2.94 प्रतिशत यानी 4,236 रुपये टूटकर 1,39,861 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया.
कमोडिटी बाजार का लुढ़का पारा
रामनवमी के अवसर पर घरेलू शेयर बाजार बंद रहे, लेकिन कमोडिटी बाजार शाम पांच बजे से रात 11.30 बजे तक खुला रहा. इस दौरान मई वायदा वाली चांदी सात बजे के आसपास 15,000 रुपये गिरकर 2.20 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई, जबकि सोना 3,000 रुपये से अधिक टूटकर 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया.
क्या है सोना-चांदी के रेट?
स्थानीय बाजारों में भी सोने-चांदी के भाव प्रभावित नजर आने लगे हैं. दिल्ली में 24 कैरेट सोना का भाव 1,47,040 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,50,000 रुपये प्रति किलो है. मुंबई और कोलकाता में सोना 1,46,890 रुपये प्रति 10 ग्राम तथा चांदी 2,50,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही थी. राज्यों के भावों में मामूली अंतर विभिन्न शहरों की लोकल टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण हो सकता है. सोने और चांदी की कीमतों में आई इस भारी गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव की अनिश्चित स्थिति है.
सोना-चांदी के दामों पर युद्ध का असर
अमेरिका ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए 15 शर्तों वाला प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया. इसके बाद अमेरिका की ओर से धमकी दी गई, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया.इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ. सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं की कीमतें आमतौर पर भू-राजनीतिक संकट में बढ़ती हैं, लेकिन इस बार मजबूत डॉलर ने इन पर दबाव बनाया.
डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की मांग प्रभावित हुई, जिसका असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी देखने को मिला. विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश के रूप में कम आकर्षक बना दिया.