'AI से जॉब मार्केट में आएगी सुनामी, 40% नौकरियां हो जाएंगी खत्म', IMF चीफ ने दी चेतावनी
जॉर्जीवा ने कहा, 'हमारे ज्ञान के आधार पर एआई वैश्विक विकास को लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ा सकता है. हमारा अनुमान है कि यह 0.8 प्रतिशत होगा...इसका मतलब है कि दुनिया कोविड महामारी से पहले की तुलना में अधिक तेजी से विकास करेगी.'
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि एआई से रोजगार बाजार में सुनामी आ सकती है. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से वैश्विक विकास में 0.8% की वृद्धि होने की उम्मीद है. लेकिन इससे 40 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि एआई से भारत का विकसित भारत बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
एआई इम्पैक्ट समिट में जॉर्जीवा ने कहा कि IMF के एक शोध से पता चला है कि एआई में वैश्विक विकास को काफी हद तक गति देने की क्षमता है. जॉर्जीवा ने कहा, 'हमारे ज्ञान के आधार पर एआई वैश्विक विकास को लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ा सकता है. हमारा अनुमान है कि यह 0.8 प्रतिशत होगा...इसका मतलब है कि दुनिया कोविड महामारी से पहले की तुलना में अधिक तेजी से विकास करेगी.'
उन्होंने भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर पॉजिटिव रहते हुए कहा कि तीव्र आर्थिक विकास शानदार है क्योंकि इससे अधिक अवसर और रोजगार सृजित होते हैं. यही दृष्टिकोण है जिसे हम भारत के लिए देखते हैं और इसका मतलब है कि विकसित भारत को प्राप्त किया जा सकता है.
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उन्होंने कहा कि एआई दुनियाभर में रोजगार के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है. जॉर्जिवा ने कहा कि हमने आकलन किया है कि खतरा बहुत बड़ा है. हम वास्तव इसके प्रभाव को सुनामी की तरह देख रहे हैं. वैश्विक स्तर पर इससे 40 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित होंगीं. उभरते बाजार में 40 प्रतिशत लेकिन विकसित अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित होंगी.
इसी बीच 17 फरवरी को इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने भी कहा था कि वर्तमान में चल रही एआई क्रांति के बीच में आगे बढ़ने के लिए खाली कोड लिखना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि नौकरियां कोडिंग से एआई सिस्टम्स को कार्यशील बनाने और उन्हें व्यवस्थित करने की ओर स्थानांतरित हो जाएंगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक के जरिए वैश्विक स्तर पर 170 मिलियन हाई-ग्रोथ जॉब सृजित हो सकती हैं.