क्या आपने कभी सोचा है कि गाड़ियों के टायर हमेशा काले ही क्यों होते हैं? जानिए इस पीछे की मजेदार विज्ञान और इतिहास

गाड़ियों के टायर काले इसलिए होते हैं क्योंकि उनमें कार्बन ब्लैक नाम का पाउडर मिलाया जाता है. प्राकृतिक रबर तो सफेद या क्रीम रंग का होता है, लेकिन शुरुआती टायर जल्दी खराब हो जाते थे.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: सड़क पर चलती हर गाड़ी के टायर देखकर अक्सर मन में सवाल उठता है – आखिर ये काले ही क्यों? क्या सिर्फ डिजाइन की बात है या कुछ और? असल में यह विज्ञान की देन है. प्राकृतिक रबर, जो लेटेक्स से बनता है, दूधिया सफेद होता है. शुरुआती दौर में टायर सफेद या हल्के रंग के ही थे, लेकिन वे कमजोर थे और जल्दी घिस जाते थे. फिर आया कार्बन ब्लैक, जो रबर में मिलाकर टायर को नई ताकत देता है. आज का काला टायर सिर्फ दिखने में नहीं, बल्कि चलने में भी सबसे बेहतर है. यह कहानी मजबूती, सुरक्षा और तकनीकी बदलाव की है.

शुरुआती टायरों का सफेद रंग और समस्या

19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में जब पहली रबर टायर बने, वे सफेद या क्रीम रंग के थे. प्राकृतिक रबर बिना किसी मिलावट के ऐसा ही रहता है. लेकिन इन टायरों में एक बड़ी कमजोरी थी – वे तेजी से घिस जाते थे. गाड़ियां तेज चलती थीं, सड़कें खराब थीं, गर्मी और रगड़ से रबर नरम होकर टूटने लगता था. कंपनियां मजबूत टायर बनाने की कोशिश में लगीं. जिंक ऑक्साइड जैसी चीजें मिलाई गईं, लेकिन असली क्रांति कार्बन ब्लैक से आई.

कार्बन ब्लैक क्या है और कैसे बनता है

कार्बन ब्लैक एक बारीक काला पाउडर है, जो पेट्रोलियम उत्पादों को कम ऑक्सीजन में जलाकर बनाया जाता है. यह लगभग शुद्ध कार्बन होता है. शुरुआत में इसे प्रिंटिंग इंक और पिगमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन 1900 के आसपास वैज्ञानिकों ने पाया कि रबर में मिलाने से टायर की ताकत कई गुना बढ़ जाती है. यह रबर के अणुओं को मजबूती देता है और वल्कनाइजेशन प्रक्रिया में मदद करता है. बिना कार्बन ब्लैक के टायर इतने कमजोर होते कि बार-बार बदलने पड़ते.

काले टायर की मजबूती और सुरक्षा के फायदे

कार्बन ब्लैक टायर को भारी वजन, तेज स्पीड और खराब सड़कों पर टिकाऊ बनाता है. गाड़ी चलते समय रगड़ से गर्मी बनती है, जो रबर को नुकसान पहुंचा सकती है. कार्बन ब्लैक यह गर्मी फैलाकर बाहर निकालता है. साथ ही सूरज की यूवी किरणों और ओजोन से बचाता है, जिससे रबर फटता या पुराना नहीं पड़ता. नतीजा? टायर लंबे समय तक चलते हैं और सुरक्षित रहते हैं. बिना इसके टायर जल्दी खराब हो जाते.unsplash.com

क्या टायर रंगीन हो सकते हैं?

हां, सिद्धांत रूप से रंगीन टायर बनाए जा सकते हैं. कार्बन ब्लैक की जगह दूसरे कलर पिगमेंट मिलाकर ऐसा किया जा सकता है. लेकिन समस्या यह है कि दूसरे पदार्थ रबर को उतनी मजबूती नहीं देते. रंगीन टायर जल्दी घिसेंगे और सुरक्षा कम होगी. इसलिए मुख्य ट्रेड हिस्सा हमेशा काला रहता है. कुछ पुरानी गाड़ियों में व्हाइटवॉल टायर दिखते थे, जहां साइडवॉल सफेद होता था, लेकिन चलने वाला हिस्सा काला ही था.

आज का काला टायर क्यों जरूरी है

आज के दौर में काला टायर सिर्फ रंग नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का कमाल है. यह मजबूती, गर्मी प्रतिरोध और लंबी उम्र देता है. कार्बन ब्लैक के बिना टायर ज्यादा महंगे और कम सुरक्षित होते. अगली बार जब आप टायर देखें, तो याद रखें – यह काला रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा और गाड़ी की लंबी जिंदगी के लिए है. विज्ञान ने इसे इतना परफेक्ट बना दिया है कि बदलाव की जरूरत ही नहीं पड़ी.