रमजान का दूसरा जुम्मा आज, रोजेदारों के लिए बरकतों का खजाना; नोट कर लें जुमे की नमाज का सही समय
रमजान 2026 का दूसरा जुम्मा 27 फरवरी को है, जो रमजान का नौवां रोजा भी है. जुमे का दिन इस्लाम में सबसे अफजल माना जाता है और रमजान में पड़ने पर उसकी फजीलत कई गुना बढ़ जाती है
नई दिल्ली: रमजान मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और रहमत का महीना है. हर रोजा खास होता है, लेकिन जब जुम्मा पड़ता है तो खुशी दोगुनी हो जाती है. इस साल रमजान 19 फरवरी से शुरू हुआ, पहला जुम्मा 20 फरवरी को था और आज 27 फरवरी को दूसरा जुम्मा है. रोजेदार सुबह से रोजा रखकर शाम तक इबादत में लगे रहते हैं. जुमे की नमाज मस्जिद में जमा होकर अदा करना सुन्नत है. यह दिन बरकतों और मगफिरत का दरवाजा खोलता है. इसलिए समय का पता होना जरूरी है ताकि कोई चूक न हो.
जुमे की नमाज का समय और खुतबा
जुमे की नमाज ज्यादातर मस्जिदों में दोपहर के वक्त अदा की जाती है. खुतबा आमतौर पर 12:15 से 12:45 बजे के बीच शुरू होता है. इमाम अल्लाह की तारीफ, रसूल पर दुरूद और नेकी की नसीहत देते हैं. इसके बाद नमाज 12:45 से 1:30 बजे के बीच पढ़ी जाती है. दिल्ली जैसे शहरों में यह समय लगभग यही रहता है, लेकिन स्थानीय मस्जिद या इमाम से पुष्टि कर लें क्योंकि मौसम और जगह के हिसाब से थोड़ा बदलाव हो सकता है.
रमजान में जुम्मे की खास फजीलत
जुम्मा का दिन हजरत मुहम्मद ने तमाम दिनों का सरदार बताया है. इसे ईद जैसा दर्जा दिया गया है. जब यह रमजान में आता है तो फजीलत और बढ़ जाती है. रोजेदारों के लिए यह बरकत और मगफिरत का बड़ा मौका होता है. जुमे के दिन की दुआएं कबूल होने की उम्मीद ज्यादा रहती है. अल्लाह बंदों के गुनाह माफ करते हैं और नेकी का सिला देते हैं. इसलिए मस्जिद पहुंचकर खूब इबादत करें.
कैसे अदा करें जुमे की नमाज
रोजेदार सुबह से इफ्तार तक रोजा रखते हुए जुमे की तैयारी करें. गुस्ल करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें. मस्जिद में जाकर खुतबा सुनें और चुप रहें. खुतबे के दौरान बात करना मना है. नमाज दो रकअत फर्ज होती है, जो जमा होकर पढ़ी जाती है. घर पर नहीं पढ़ सकते. जुमे के बाद दुआ मांगें, कुरान पढ़ें और सदका दें. परिवार के साथ मिलकर इस दिन को यादगार बनाएं.
जुमे का संदेश और तैयारी
जुम्मा सिर्फ नमाज का दिन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और नेकी का मौका है. रमजान में यह और भी पवित्र हो जाता है. आज के जुमे में अल्लाह से माफी, स्वास्थ्य और खुशहाली मांगें. मस्जिद जाने से पहले समय चेक कर लें. स्थानीय ऐप या मस्जिद नोटिस देखें. रमजान की बरकतें हासिल करने के लिए हर जुम्मा खास इबादत का दिन बनाएं. अल्लाह सबकी दुआएं कबूल फरमाए.
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