Janmashtami 2026: एक मटकी के लिए बनता है इंसानी पिरामिड, आखिर क्यों मनाते हैं दही हांडी? जानें इससे जुड़ी 5 खास बातें
दही हांडी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला लोकप्रिय उत्सव है, जिसे कई जगह गोपालकाला भी कहा जाता है.
नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद सड़कों पर उमड़ती भीड़, ढोल की आवाज और आसमान से गिरती पानी की बौछारें दही हांडी के उत्सव का रंग और बढ़ा देती हैं. यह पर्व खासतौर पर मुंबई, ठाणे, मथुरा और वृंदावन जैसे इलाकों में उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसमें गोविंदाओं की टोलियां ऊंचाई पर लटकी दही-माखन की मटकी तक पहुंचने की कोशिश करती हैं.
कृष्ण की बाल लीला से जुड़ी परंपरा
दही हांडी को श्रीकृष्ण के माखनचोर रूप से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों के घरों में रखी ऊंची मटकी से माखन निकालते थे. इसी लीला को उत्सव का रूप देते हुए दही और माखन से भरी मटकी ऊंचाई पर बांधी जाती है.
मटकी तक पहुंचने का अनोखा खेल
इस आयोजन में गोविंदा कहलाने वाले युवक और युवतियां एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते हैं. सबसे ऊपर पहुंचने वाला छोटा बच्चा मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ता है. ऊंचाई बढ़ने के साथ चुनौती भी बढ़ती जाती है, इसलिए हर सदस्य की भूमिका अहम होती है.
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भरोसे के बिना जीत मुश्किल
दही हांडी में केवल ताकत काम नहीं आती. पिरामिड को संभालने के लिए शरीर का संतुलन, अनुशासन और आपसी तालमेल जरूरी होता है. एक सदस्य का संतुलन बिगड़ने पर पूरी टीम प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि यह उत्सव टीमवर्क और एक-दूसरे पर भरोसे की मिसाल भी माना जाता है.
लाखों के इनाम से बढ़ता रोमांच
महाराष्ट्र में दही हांडी बड़े प्रतियोगी आयोजन के रूप में भी सामने आता है. मुंबई और ठाणे में गोविंदा पथक कई मंजिल ऊंचे पिरामिड बनाने की चुनौती लेते हैं. 8 से 9 मंजिल तक पहुंचने वाली टीमों के लिए लाखों रुपये के नकद पुरस्कार और ट्रॉफियां रखी जाती हैं, जिससे प्रतियोगिता का उत्साह और बढ़ जाता है.
संगीत और पानी से रंगीन होता माहौल
उत्सव के दौरान सड़कों पर गीत-संगीत के बीच गोविंदाओं का हौसला बढ़ाया जाता है. पिरामिड बनाने वाली टोलियों के आसपास मौजूद लोग उत्साह में नाचते-गाते हैं. गर्मी से राहत देने और जोश बढ़ाने के लिए आसपास की इमारतों से गोविंदाओं पर पानी की बौछार भी की जाती है.
उत्सव के साथ सुरक्षा भी जरूरी
दही हांडी में ऊंचे मानव पिरामिड बनाए जाते हैं, इसलिए कुछ स्थानों पर हादसों के कारण इस आयोजन पर प्रतिबंध भी लगाया गया है. फिर भी जहां यह परंपरा जारी है, वहां लोगों के बीच इसका खास उत्साह देखने को मिलता है. धार्मिक मान्यता, प्रतियोगिता, संगीत और सामूहिक भागीदारी इसे जन्माष्टमी से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल बनाते हैं.