होलिका दहन की पूरी तैयारी, ये 18 सामग्रियां जरूर रखें थाली में; पूजा रहेगी पूरी और फल मिलेगा दोगुना
होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. होलिका दहन से पहले सुबह पूजा और शाम को प्रदोष काल में दहन किया जाता है. इस बार पंचांग के अनुसार होलिका दहन 3 मार्च 2026 को होगा.
नई दिल्ली: होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है जो अच्छाई की जीत का संदेश देती है. होलिका दहन इसकी शुरुआत है, जहां शाम को अग्नि में बुराई जलती है और सुबह होलिका की पूजा से दिन की शुरुआत होती है. परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से घर में खुशियां बनी रहती हैं. इस साल होलिका दहन 3 मार्च को प्रदोष काल में होगा. पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखना जरूरी है, ताकि कोई चूक न हो. आइए जानते हैं वो जरूरी चीजें जो थाली में रखनी चाहिए और उनका महत्व क्या है.
पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
होलिका पूजन के लिए थाली में ये सामग्रियां जरूर रखें: नारियल, गुलाल, रोली, धूप, फूल, गाय के गोबर के उपलों से बनी माला, अनाज (खासकर नया गेहूं की बालियां), साबुत मूंग दाल, कलावा, कलश में थोड़ा जल, सुपारी, घी, मिट्टी का दीपक, सरसों के दाने, लाल कपड़े का टुकड़ा, गन्ना और मलपुआ या गुजिया जैसी मिठाई. ये सब मिलाकर पूजा पूरी होती है. परिवार के साथ जाकर होलिका के पास पूजा करें, ताकि उत्साह दोगुना हो जाए.
गोबर उपलों की माला का खास महत्व
गाय के गोबर के उपलों से बनी माला होलिका दहन में सबसे महत्वपूर्ण है. मान्यता है कि हर उपला परिवार के सदस्य के नाम से अग्नि में डाला जाता है. इससे हर सदस्य पर सुरक्षा कवच बनता है. यह प्रहलाद की रक्षा और होलिका के अहंकार के दहन का प्रतीक है. माला चढ़ाते समय मन में अच्छे विचार रखें. पूजा के बाद घर के बुजुर्गों से आशीर्वाद लें, जो खुशियां बढ़ाता है.
दहन के दौरान क्या करें
होलिका दहन पर घर से एक लकड़ी का टुकड़ा लेकर जाएं और उसे अग्नि में डालें. अग्नि को प्रणाम करें और चारों ओर परिक्रमा लगाएं. सुख-समृद्धि की कामना करें. दहन के बाद होलिका की राख से सभी सदस्यों को तिलक लगाएं. ऐसा करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. शाम का प्रदोष काल सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए समय पर पहुंचें.
परंपरा का संदेश और सावधानियां
होलिका दहन सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि जीवन का सबक है – बुराई जल जाए और अच्छाई बनी रहे. पूजा में कोई कमी न छोड़ें, ताकि फल पूरा मिले. क्षेत्रीय परंपराओं में गन्ना या अन्य चीजें भी डाली जाती हैं, उन्हें शामिल कर सकते हैं. परिवार के साथ मनाएं, ताकि भाईचारा मजबूत हो. इस बार ग्रहण के कारण तिथि को लेकर भ्रम था, लेकिन प्रमुख पंचांग 3 मार्च को दहन बता रहे हैं.