Hartalika Teej 2026: 14 सितंबर को 7 साल बाद अद्भुत संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
14 सितंबर 2026 को हरितालिका तीज पर 7 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है. तृतीया व चतुर्थी के महायोग में व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति होगी.
अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति का महापर्व 'हरितालिका तीज' इस वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाएगा. इस बार 7 वर्षों के बाद ग्रहों और तिथियों का अलौकिक संयोग बन रहा है. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, और इसी दिन तृतीया के साथ चतुर्थी का महायोग भी बन रहा है. इससे व्रतियों को शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश का भी विशेष आशीर्वाद मिलेगा.
शुभ मुहूर्त और तिथि का महत्व
शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी युक्त तृतीया तिथि इस व्रत के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है. 14 सितंबर को उदयातिथि में तृतीया तिथि सुबह 7:19 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी. इस कारण सोमवार के दिन गणेश चतुर्थी के संयोग में व्रत का पालन करना ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है.
व्रत के कड़े नियम
हरितालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है. यह उपवास पूरी तरह से निर्जला और निराहार रखा जाता है. हालांकि, अस्वस्थ या शारीरिक रूप से अक्षम महिलाएं आवश्यकतानुसार जल ग्रहण कर सकती हैं. इस व्रत का मुख्य नियम यह है कि व्रती को रात में सोना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी रात जागरण करना अनिवार्य होता है.
प्रदोष काल की सही पूजा विधि
इस व्रत की मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है. शाम को स्नान के बाद चौकी पर मंडप सजाकर शिव-पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित करें. इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य से पूजन कर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें. रात भर भजन-कीर्तन कर जागरण करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.