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हरियाली तीज आज, अखंड सौभाग्य के लिए इस विधि और मुहूर्त पर करें पूजा

हरियाली तीज आज है. यह त्योहार केवल सुहागिन महिलाओं के लिए नहीं बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए भी बहुत खास माना जाता है. कुंवारी कन्याएं इस दिन मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं, दोनों की पूजा विधि प्रक्रिया लगभग एक जैसा ही है. हरियाली तीज में भगवान शिव को मनाने के लिए जाप बहुत जरूरी होता है.

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आज हरियाली तीज है. मान्यता है कि शिव और पार्वती के रिश्ते की शुरुआत इसी दिन हुई थी. सावन माह शुरू होते ही शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, खुशहाल जीवन और अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना के साथ ही उपवास रखती है.

हरियाली तीज का त्योहार केवल सुहागिन महिलाओं के लिए नहीं बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए भी बहुत खास माना जाता है. कुंवारी कन्याएं इस दिन मनचाहे और योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है. मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है और जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है.

हरियाली तीज आज

सावन के महीने में आने वाले हरियाली तीज के त्यौहार का बहुत महत्व माना जाता है. भारत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में यह त्यौहार बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है. कहते हैं कि इसी दिन यानी हरियाली तीज वाले दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था. माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसलिए इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव के फिर से मिलन के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि तभी से ही हरियाली तीज का त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है.

हरियाली तीज का महत्व

मान्यता है कि हरियाली तीज का व्रत हिमालय पुत्री माता पार्वती ने ही किया था. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया थाय वृक्ष, नदियों और जल के देवता वरुण की भी उपासना इसी दिन की जाती है. मनचाहे वर की प्राप्ति और विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए यह व्रत बहुत उत्तम माना जाता है. मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया था. इसी दिन वृक्ष, नदी और जल के देवता वरुण की भी उपासना की जाती है. मनचाहे वर की प्राप्ति और विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए यह व्रत बहुत उत्तम माना जाता है.

कैसे करें हरियाली तीज?

इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती है. हरियाली तीज में भगवान शिव को मनाने के लिए जाप बहुत जरूरी होता है इसके लिए अगर आप किसी कठिन मंत्र का जाप नहीं कर पा रहे तो  ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र या ‘ॐ उमायै नम:’ का जाप करें इससे पूजा विधि सफल मानी जाती है. हरियाली तीज पर पूजा करने का उत्तम मुहूर्त सुबह पांच बजकर 45 मिनट से शुरू है और शाम में 7 बजकर 6 मिनट का आखिरी समय है. इस अवधि में आप किसी भी समय पूजा कर सकते हैं.