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Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, जिंदगी भर पड़ सकता है पछताना

आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इस दौरान खासकर गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. चलिए जानते हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

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आज यानी 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो काफी खास है क्योंकि यह होली के दिन पड़ रहा है. यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जो लगभग 100 साल बाद होली के साथ संयोग से हो रही है. भारत में यह टोटल लूनर एक्लिप्स (पूर्ण चंद्र ग्रहण) के रूप में दिखाई देगा, जहां चंद्रमा 'ब्लड मून' जैसा लाल रंग का नजर आएगा. 

ग्रहण की टाइमिंग (IST के अनुसार): ग्रहण शुरू: दोपहर 3:20 बजे

अधिकतम ग्रहण: शाम लगभग 5:33-6:33 बजे के आसपास (क्षेत्र के अनुसार)

ग्रहण समाप्त: शाम 6:47 बजे तक

भारत में चंद्रमा शाम 6:26 बजे के बाद दिखाई देगा, इसलिए अधिकांश लोग शाम में इसका अंतिम चरण देख पाएंगे. सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्त होने तक रहता है.

चंद्र ग्रहण क्या है?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी पूरी या आंशिक रूप से ब्लॉक हो जाती है. हिंदू मान्यताओं में इसे राहु-केतु से जोड़ा जाता है, जो अशुभ ग्रह माने जाते हैं. 

गर्भवती महिलाओं पर प्रभाव

हिंदू परंपरा में गर्भावस्था को बहुत संवेदनशील और पवित्र माना जाता है. चंद्रमा को भावनाओं, मन, पानी और मातृत्व से जोड़ा जाता है. ग्रहण के दौरान चंद्रमा की ऊर्जा प्रभावित होती है, इसलिए बुजुर्गों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. हालांकि आधुनिक विज्ञान कहता है कि ग्रहण से गर्भावस्था पर कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से कई दिशानिर्देश दिए जाते हैं ताकि मां और बच्चे की सुरक्षा बनी रहे.

गर्भवती महिलाओं के लिए चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें:-

ग्रहण के समय घर के अंदर रहें और बाहर न निकलें. इससे बच्चे की सुरक्षा के लिए आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है. शांत रहें, प्रार्थना करें, मंत्र जपें (जैसे गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र) या धार्मिक ग्रंथ पढ़ें. इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

ग्रहण के बाद स्नान करें. पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें या रॉक सॉल्ट मिलाकर नहाएं, ताकि नकारात्मक प्रभाव दूर हो. तुलसी के पत्ते पानी में डालकर पी सकते हैं और सात्विक भोजन तैयार करें.

न करें:- इस दौरान कुछ भी खाएं या पिएं नहीं. ग्रहण से पहले तैयार भोजन भी न खाएं, क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है. कोई शारीरिक मेहनत या भारी काम न करें. आराम करें और तनाव से दूर रहें. तेज धार वाले औजार (चाकू, सुई आदि) का इस्तेमाल न करें.  ग्रहण के दौरान सोने या बाहर घूमने से बचें. यह परंपरागत सलाह है, जो सदियों से चली आ रही है. अगर कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें.