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ऊषा अर्घ्य के साथ खत्म हुआ चैती छठ, पारण के समय क्या खाएं और क्या नहीं? जानें पारंपरिक नियम

चैती छठ 2026 आज 25 मार्च को ऊषा अर्घ्य के साथ पूरा हो गया. अर्घ्य देने के बाद व्रतधारियों ने पारण किया.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त हुआ. भक्तों ने घाटों पर पूजा अर्चना की और फिर घर लौटकर पारण किया. लंबे व्रत के बाद अचानक भारी खाना खाने से पेट खराब हो सकता है, इसलिए पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है. अदरक और गुड़ से शुरुआत कर ठेकुआ-कसार जैसे प्रसाद पहले ग्रहण किए जाते हैं. परिवार की महिलाएं सादा और पौष्टिक भोजन तैयार करती हैं ताकि शरीर आसानी से रिकवर कर सके.

ऊषा अर्घ्य के बाद पारण की शुरुआत

पारण की शुरुआत अक्सर अदरक के छोटे टुकड़े और गुड़ के साथ होती है. यह पाचन अग्नि को धीरे-धीरे जगाता है और शरीर को शॉक नहीं लगने देता. कई परिवार गुड़ के साथ थोड़ा सा पानी या नारियल पानी भी लेते हैं. 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद तरल पदार्थों से शरीर में पानी की कमी पूरी की जाती है. यह परंपरा स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है.

मुख्य प्रसाद पहले ग्रहण करें

सबसे पहले पूजा का मुख्य प्रसाद ठेकुआ और कसार (चावल के लड्डू) खाना चाहिए. ये दोनों चीजें पूरे पर्व के दौरान बनाई और चढ़ाई जाती हैं. ठेकुआ गेहूं के आटे से बनता है और कसार चावल के आटे का मीठा व्यंजन होता है. इन्हें पहले ग्रहण करने से व्रत का पूरा पुण्य मिलता है और फिर धीरे-धीरे अन्य भोजन शुरू किया जाता है.

सात्विक और हल्का भोजन का चुनाव

पारण के दिन पूरी तरह सात्विक भोजन करना चाहिए. पारंपरिक रूप से चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी, साग और अन्य हल्की सब्जियां बनाई जाती हैं. सेंधा नमक का इस्तेमाल उत्तम माना जाता है. तेल-मसाले बहुत कम डाले जाते हैं ताकि पेट पर बोझ न पड़े. कई जगहों पर लौकी-भात का सादा भोजन ही पारण का मुख्य हिस्सा होता है.

पानी और तरल पदार्थों पर ध्यान

लंबे व्रत के बाद शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है. इसलिए नारियल पानी, नींबू पानी या सादा जल पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए. धीरे-धीरे शुरू करें ताकि पेट सहज रहे. फल जैसे केला या सेब भी हल्के में लिया जा सकता है. यह शरीर को ऊर्जा देता है और व्रत के प्रभाव को संतुलित करता है.

किन चीजों से बचें पारण के दिन

पारण के दिन लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल वर्जित रहता है. व्रत खोलते ही तला-भुना, ज्यादा तेल-मसालेदार या भारी खाना नहीं खाना चाहिए. इससे पेट दर्द, गैस या अपच हो सकती है. सादगी और संयम बनाए रखना ही इस पर्व की खासियत है. परिवार के सभी सदस्य इन नियमों का सम्मान करते हैं.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.