सरहुल पूजा मछली-केकड़े को पकड़े बिना क्यों है अधूरी?


Princy Sharma
31 Mar 2025

सरहुल

    आज, 31 मार्च 2025 से आदिवासियों के महापर्व सरहुल की शुरुआत हो गई है. हातमा के जगलाल पाहन ने कहा कि पहले दिन सभी सरना समुदाय उपवास करेंगे.

मछली और केकड़ा

    आज के दिन मछली और केकड़ा भी पकड़ा जाएंगे. सभी युवा आसपास के तालाब, पोखर या चुआं जाकर मछली और केकड़ा पकड़ेंगे.

पुरखों का स्मरण

    आज के दिन सभी लोग पुरखों का स्मरण करेंगे और उन्हें पकवान अर्पित करेंगे. साथ में शाम में जल रखाई पूजा की जाएगी.

5 मुर्गे-मुर्गियों की बलि

    जल रखाई पूजा के वक्त 5 मुर्गे-मुर्गियों की बलि दी जाएगी.

धरती के पूर्वज

    आदिवासी समाज मानते हैं कि मछली और केकड़ा धरती के पूर्वज हैं.

कैसे बनी पृथ्वी?

    उनका मानना है कि समुद्र के नीचे मिट्टी ऊपर लाकर ही पृथ्वी बनी है. इसका पहली कोशिश मछली और केकड़े ने की थी.

सरहुल का पहला दिन

    ऐसे में सरहुल का पहला दिन मछली और केकड़े को समर्पित होता है. वे किचन में केकड़े को ऊपर टांग देते हैं.

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