बाढ़ के बाद बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, जानें कैसे करें बचाव


Shanu Sharma
28 Aug 2026

बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा क्यों बढ़ता है?

    बाढ़ अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है. दूषित पानी, गंदगी, खराब साफ-सफाई और राहत शिविरों में भीड़ के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में पेट, त्वचा और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका रहती है.

दूषित पानी बन सकता है बीमारी की वजह

    बाढ़ का पानी सीवर, कचरे और अन्य गंदे स्रोतों के संपर्क में आकर दूषित हो सकता है. यही पानी पीने या इसके संपर्क में आने से शरीर में कई तरह के रोगाणु पहुंच सकते हैं. हेपेटाइटिस ए, मियादी बुखार, शिगेलोसिस और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा ऐसे हालात में बढ़ जाता है.

मियादी बुखार में दिख सकते हैं ये लक्षण

    एंटरिक फीवर को आम बोलचाल में मियादी बुखार कहा जाता है. इसमें बुखार धीरे-धीरे बढ़ सकता है और लंबे समय तक बना रह सकता है. इसके साथ पेट दर्द, मरोड़, जी मिचलाना, उल्टी और दस्त जैसी परेशानी हो सकती है

शिगेलोसिस और हैजा का भी खतरा

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शिगेलोसिस का संक्रमण भी फैल सकता है. इसमें बुखार, सिरदर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं हैजा दूषित पानी से फैलने वाली गंभीर बीमारी है.

लेप्टोस्पायरोसिस से भी रहें सावधान

    बाढ़ के पानी के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस का जोखिम भी बढ़ सकता है. संक्रमित जानवरों के पेशाब से दूषित पानी इसके फैलने का कारण बन सकता है. बाढ़ के पानी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

त्वचा के संक्रमण का खतरा

    बाढ़ के दौरान शरीर पर लगी छोटी चोट भी संक्रमण का कारण बन सकती है. दूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा और शरीर के अंदरूनी मुलायम ऊतकों में संक्रमण होने का खतरा रहता है. इसलिए खुले घाव को ढककर रखना और बाढ़ के गंदे पानी से सीधे संपर्क से बचना जरूरी है.

बाढ़ के बाद कई रोगाणु हो सकते हैं सक्रिय

    विशेषज्ञों के अनुसार बाढ़ के बाद एक साथ कई तरह के संक्रमण फैलने की स्थिति बन सकती है. गंदे पानी के कारण ई. कोलाई, रोटावायरस और नोरोवायरस जैसे रोगाणु सक्रिय हो सकते हैं.

पीने के पानी को लेकर बरतें सावधानी

    बाढ़ के बाद पीने के पानी को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है. यदि पानी साफ और सुरक्षित होने को लेकर संदेह हो तो उसे कम से कम एक मिनट तक उबालकर पीना बेहतर है.

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