आपके स्ट्रेस को तुरंत कम करेगी जर्नलिंग, जानें कैसे
जर्नलिंग क्या है?
जर्नलिंग का मतलब है अपने दैनिक विचारों, भावनाओं और अनुभवों को नियमित रूप से लिखना. यह सामान्य डायरी लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें कोई सख्त नियम नहीं होते. आप जो महसूस कर रहे हैं, उसे बिना किसी जजमेंट के कागज पर उतार सकते हैं.
दिमाग पर बोझ क्यों बढ़ता है?
दिन भर में हमारे दिमाग में कई विचार आते हैं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ता है. रिसर्च बताती हैं कि अनप्रोसेस्ड भावनाएं तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाती हैं.
जर्नलिंग से कैसे कम होते हैं तनाव?
जब आप अपनी चिंताओं और विचारों को लिखते हैं, तो मस्तिष्क को लगता है कि ये बातें अब सुरक्षित जगह पर हैं. इससे बार-बार सोचने की जरूरत कम हो जाती है.
भावनाओं को प्रोसेस
अध्ययनों से पता चलता है कि नियमित जर्नलिंग से चिंता के लक्षणों में कमी आती है और मन शांत होता है. लिखने की प्रक्रिया भावनाओं को प्रोसेस करती है, जिससे तनाव धीरे-धीरे कम होता जाता है.
जर्नलिंग के कई फायदे
सबसे पहले परेशानियां लिखते समय सकारात्मक पहलू भी सामने आते हैं, जिससे नेगेटिव थिंकिंग कम होती है. इसके अलावा बेहतर याददाश्त और फोकस और अच्छी नींद में भी मदद करती है.
कैसे शुरू करें जर्नलिंग?
रोजाना 10-15 मिनट निकालें. कोई फैंसी नोटबुक की जरूरत नहीं – सादा पेज ही काफी है. सोने से पहले का समय सबसे अच्छा होता है.
लिखने का खास तरीका
जर्नलिंग के समय बस लिखते रहें, बिना रुके या सोचे. समय के साथ यह आदत बन जाएगी और आपका मन हल्का महसूस करेगा.