सैलरी के लिए नहीं, इस कारण एम्प्लॉइज छोड़ रहे कंपनी
इज्जत सबसे पहली शर्त
आज लोग चाहते हैं कि ऑफिस में उन्हें इंसान की तरह ट्रीट किया जाए. अपमान, ताने या पावर का गलत इस्तेमाल अब लोग सहने को तैयार नहीं हैं. सम्मान से बात होना सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है.
साइकोलॉजिकल सेफ्टी
कर्मचारी चाहते हैं कि वे बिना डरे अपनी राय रख सकें. गलती होने पर डर या शर्मिंदगी नहीं, बल्कि सीखने का मौका मिले. सुरक्षित माहौल में ही बेहतर काम निकलता है.
असली ग्रोथ
लोग अब खोखले वादों से थक चुके हैं. उन्हें ऐसी ग्रोथ चाहिए जहां सच में कुछ सीखने को मिले, नई स्किल बने और करियर आगे बढ़े. सिर्फ टाइटल बदलने से संतुष्टि नहीं मिलती.
मतलब वाला काम
केवल टारगेट और KPI तक सीमित काम अब लोगों को प्रेरित नहीं करता. कर्मचारी चाहते हैं कि उनके काम का कोई मकसद हो और वह किसी बड़े लक्ष्य से जुड़ा दिखे.
पहचान और सराहना
आज लोग देखे जाना चाहते हैं. मेहनत करने के बाद अगर नजरअंदाज किया जाए तो मोटिवेशन खत्म हो जाता है. छोटी सराहना भी बड़े असर डालती है.
वर्क-लाइफ बैलेंस
लगातार काम और बर्नआउट अब स्वीकार्य नहीं है. लोग शांति, निजी समय और मानसिक संतुलन को महत्व दे रहे हैं. काम के साथ जिंदगी भी जरूरी है.
भरोसा और आजादी
कर्मचारी चाहते हैं कि उन पर भरोसा किया जाए. माइक्रोमैनेजमेंट से घुटन होती है. जब ओनरशिप मिलती है, तब जिम्मेदारी भी खुद-ब-खुद आती है.
फेयर ट्रीटमेंट
पसंद-नापसंद के आधार पर फैसले अब लोगों को मंजूर नहीं. सभी के लिए नियम एक जैसे हों और फैसले पारदर्शी तरीके से लिए जाएं.
भविष्य का साफ रोडमैप
लोग जानना चाहते हैं कि वे किस दिशा में जा रहे हैं. कन्फ्यूजन नहीं, बल्कि एक साफ रास्ता चाहिए ताकि वे अपने करियर को लेकर आश्वस्त महसूस कर सकें.