कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा? जानें तारीख और नियम
कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत
कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से होने की संभावना है. यह यात्रा 11 अगस्त यानी सावन शिवरात्रि तक चलेगी.
क्या है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा भगवान शिव को समर्पित पवित्र तीर्थयात्रा है. श्रद्धालु गंगा का जल कांवड़ में भरकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों तक पैदल पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं.
क्यों चढ़ाया जाता है गंगाजल?
धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने से सुख, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. यह परंपरा समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ी मानी जाती है.
कहां से लाया जाता है पवित्र जल?
अधिकतर श्रद्धालु हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल लेते हैं. इसके अलावा गंगोत्री, गोमुख, ऋषिकेश और बिहार के सुल्तानगंज से भी जल लाने की परंपरा है.
केसरिया वस्त्र पहनने का क्या महत्व है?
कांवड़िये केसरिया या नारंगी वस्त्र धारण करते हैं. यह रंग भक्ति, त्याग, पवित्रता और भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक माना जाता है.
यात्रा के दौरान किन नियमों का पालन होता है?
श्रद्धालु नंगे पैर यात्रा करते हैं, सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, स्वच्छता बनाए रखते हैं और शराब, तंबाकू जैसी चीजों से दूर रहते हैं. कांवड़ को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता.
सबसे महत्वपूर्ण दिन कौन सा है?
सावन शिवरात्रि कांवड़ यात्रा का सबसे अहम दिन माना जाता है. इस वर्ष 11 अगस्त को श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल से जलाभिषेक कर अपनी यात्रा पूरी करेंगे.
यात्रा से पहले क्या रखें ध्यान?
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु सड़कों पर होते हैं. ऐसे में कई मार्गों पर यातायात में बदलाव किया जाता है. सफर से पहले स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देख लें.