जन्माष्टमी पर छप्पन भोग नहीं बना सकते तो इन 5 चीजों से करें कान्हा को प्रसन्न
जन्माष्टमी पर छप्पन भोग की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार गोवर्धन पर्वत उठाने के दौरान कान्हा 7 दिनों तक भूखे रहे थे. इसके बाद ब्रजवासियों ने 56 प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें अर्पित किए थे.
पहला भोग माखन-मिश्री
कान्हा को माखन और मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है. जन्माष्टमी की पूजा में माखन-मिश्री का भोग खास महत्व रखता है.
दूसरा भोग धनिया पंजीरी
जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष महत्व माना जाता है. इसे धनिया, मेवे और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है.
तीसरा भोग पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार किया जाता है. भगवान कृष्ण के अभिषेक के साथ पंचामृत का भोग भी लगाया जाता है.
चौथा भोग मखाना खीर या पेड़ा
जन्माष्टमी पर दूध से बनी मिठाइयों का भोग भी लगाया जाता है. मखाना खीर, पेड़ा और अन्य दुग्ध पदार्थों को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान कृष्ण को अर्पित किया जा सकता है.
पांचवां भोग तुलसी दल के साथ
कृष्ण पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है.
56 भोग में क्या-क्या होता है?
छप्पन भोग में मिठाई, नमकीन, अन्न, फल, पेय और सूखे मेवे जैसी कई चीजें शामिल होती हैं. इसमें कचौरी, पूरी, मठरी, पेड़ा, बर्फी, मालपुआ, जलेबी, लस्सी, दूध, मखाना और ऋतु फल आदि शामिल किए जा सकते हैं.
पांच भोग न बना पाएं तो क्या करें?
हर भक्त के लिए 56 तरह के पकवान बनाना संभव नहीं होता. ऐसे में श्रद्धा के अनुसार माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचामृत जैसे प्रमुख प्रसाद भी अर्पित किए जा सकते हैं.
कान्हा को भोग लगाते समय रखें भाव
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और प्रेम रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार प्रसाद तैयार करें और पूजा के बाद परिवार के साथ इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.