नवरात्रि स्पेशल: बानड़ी देवी मंदिर की अखंड ज्योति क्यों है खास?


Babli Rautela
04 Apr 2025

मां विंध्यवासिनी बानड़ी देवी मंदिर

    देवभूमि उत्तराखंड में कई पवित्र मंदिर हैं, जिनमें से हर मंदिर की अपनी खास मान्यताएं हैं. अल्मोड़ा में स्थित मां विंध्यवासिनी बानड़ी देवी मंदिर इनमें से एक है. इसे 'दिए वाली देवी' के नाम से भी जाना जाता है.

मंदिर की अनोखी परंपरा

    मां विंध्यवासिनी बानड़ी देवी मंदिर की खासियत यह है कि यहां भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाते हैं.

नवरात्रि में मंदिर का महत्व

    नवरात्रि के दौरान मां विंध्यवासिनी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. इस अवसर पर सैकड़ों दिए जलाए जाते हैं, जो मंदिर को प्रकाशमय बना देते हैं.

मंदिर का प्राकृतिक ठिकाना

    अल्मोड़ा-लमगड़ा मार्ग पर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर, 7 हजार फीट की ऊंचाई पर यह मंदिर बांज के जंगलों में स्थित है.

पैदल यात्रा की चुनौती

    मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सड़क से कई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है.

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

    वर्ष 1563 में चंद वंश के राजा बालो कल्याण चंद ने अल्मोड़ा की स्थापना की थी. कहा जाता है कि मां बाराही देवी के निर्देश पर राजा ने उन्हें इस स्थान पर स्थापित किया, जिससे मंदिर का निर्माण हुआ.

देवी के तीन शक्ति रूप

    इस मंदिर में मां भगवती पिंड के तीन शक्ति रूपों में विराजमान हैं. यह विशेषता मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाती है.

अखंड दिए जलाने की प्रथा

    मंदिर में मनोकामना पूरी होने पर भक्त नौ दिनों तक अखंड दिया जलाते हैं. यह प्रथा सदियों से चली आ रही है और स्थानीय लोगों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है.

क्यों है यह मंदिर खास?

    प्रकृति की सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति मां विंध्यवासिनी बानड़ी देवी मंदिर को शानदार बनाता है. नवरात्रि के दीपों और कठिन यात्रा के बावजूद, यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.

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