भोलेनाथ को क्यों चढ़ाया जाता है धतूरा और बेल पत्र?


Princy Sharma
25 Feb 2025

महाशिवरात्रि

    महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. इस साल शिवरात्रि का पावन पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था.

धतूरा और बेल पत्र

    महाशिवरात्रि के दिन सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए धतूरा और बिल्व पत्र चढ़ाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका क्या महत्व है और इन्हें भोलेनाथ को क्यों चढ़ाया जाता है.

जहरीला और कड़वा

    वामन पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव ने विष पी लिया था, तब उनके वक्षस्थल से धतूरा निकला था. बता दें, धतूरा जहरीला और कड़वा होता है.

क्यों चढ़ाया जाता है धतूरा?

    भगवान को चढ़ाया जाने वाला धतूरा का फल या फूल इस बात का प्रतीक है कि हम समर्पण कर रहे हैं और अपनी सारी कड़वाहट, नकारात्मकता और घृणा, ईर्ष्या और क्रोध जैसी विषाक्तता से छुटकारा पा रहे हैं. इससे आप पवित्र हो जाते हैं और सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं.

बेल पत्र

    बेल पत्र, जिसे बिल्व पत्र के नाम से भी जाना जाता है, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली छह आवश्यक चीजों में से एक है.

महादेव को प्रिय चीज

    रुद्राक्ष की माला के बाद, बिल्व पत्र महादेव को सबसे प्रिय चीज है. शिव पूजा के दौरान, महामृत्युंजय और अन्य शिव मंत्रों के जाप के साथ इन पत्तियों को शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है.

स्कंद पुराण

    स्कंद पुराण में उल्लेख है कि एक बार देवी पार्वती के पसीने की बूंदें मंदराचल पर्वत पर गिरीं. इससे वहां एक बेल या बिल्व का पौधा उग आया.

क्या है मान्यता?

    मान्यता है कि शिव की दिव्य पत्नी पार्वती अपने सभी रूपों में बिल्व वृक्ष में निवास करती हैं. वे जड़ों में गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षायनी, पत्तियों में पार्वती, फलों में कात्यायनी और फूलों में गौरी के रूप में निवास करती हैं.

भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न?

    ऐसा माना जाता है कि 100 कमल के फूल 1 नीलकमल के बराबर होते हैं और 1000 नीलकमल 1 बेलपत्र के बराबर होते हैं. इसलिए बेलपत्र चढ़ाना भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है.

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