क्या मुमकिन है समय की यात्रा, जानें क्या कहता है प्रैक्टिकल विज्ञान


    आइए आज समझते हैं कि हकीकत में टाइम ट्रैवल पर साइंस की क्या राय है?

    अधिकांश लोग इसे साइंस फिक्शन बताकर खारिज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विज्ञान ने टाइम ट्रैवल के सिद्धांतों को पूरी तरह खारिज नहीं किया है.

    टाइम ट्रैवल अर्थात समय यात्रा की बातें 1895 में प्रकाशित किए गए 'द टाइम मशीन' उपन्यास में मिलती हैं. लेकिन यह पूरी तरह से समझाने वाला नहीं था.

    1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने 'सापेक्षता के सिद्धांत' के द्वारा एक नई दृष्टिकोण प्रस्तुत किया.

    उन्होंने यह बताया कि 'समय' एक गति से नहीं चलता, बल्कि पूरी तरह से 'गति' यानी 'स्पीड' पर आश्रित होता है.

    1971 में वैज्ञानिक जोसेफ सी हाफेले और रिचर्ड ई कीटिंग ने 'सापेक्षता के सिद्धांत' के आधार पर एक एक्सपेरिमेंट किया था.

    इस एक्सपेरिमेंट में उन्होंने चार एटॉमिक क्लॉक का इस्तेमाल किया था. इसमे यह निष्कर्ष निकला की गति को बढ़ा लिया जाए तो समय आगे बढ़ सकता है.

    अभी तक विज्ञान उतनी तरक्की नहीं कर पाया है लेकिन यह भविष्य में संभव है.

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