बंगाल के अकाल ने बदल दी जिंदगी, अब मिला भारत रत्न


2024/02/09 13:14:51 IST

हरित क्रांति के थे जनक

    केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डॉक्टर एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने की घोषणा की है. स्वामीनाथ की पिछले साल 98 साल की उम्र में निधन हो गया था.

Credit: सोशल मीडिया

पिछले साल सितंबर में हुआ था निधन

    देश के प्रसिद्ध एग्रीकल्चर साइंटिस्ट एमएस स्वामीनाथन का पिछले साल यानी 28 सितंबर 2023 को निधन हुआ था. उन्होंने तमिलनाडु में जीवन के अंतिम पल बिताए थे.

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तंजावुर में हुआ था जन्म

    एमएस स्वामीनाथन का पूरा नाम मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथ था. उनका जन्म 7 अगस्त 1925 को तंजावुर में हुआ था.

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कोयंबटूर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के थे छात्र

    स्वामीनाथन ने तिरुवनंतपुरम के महाराजा कॉलेज जूलॉजी की पढ़ाई के बाद कोयंबटूर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर साइंस में बीएससी की डिग्री ली थी.

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महात्मा गांधी से थे प्रेरित

    स्वामीनाथन को शुरुआत से एग्रीकल्चर साइंस में इंट्रेस्ट था. वे आजादी की लड़ाई में भी शामिल हुए थे. वे महात्मा गांधी से वे काफी प्रेरित थे.

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गांधी के कहने पर किया ये काम

    कहा जाता है कि महात्मा गांधी के प्रभाव ने एमएस स्वामीनाथन को एग्रीकल्चर साइंटिस्ट बना दिया. गांधी के कहने पर ही उन्होंने एग्रीकल्चर में आगे की पढ़ाई की.

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हरित क्रांति को बनाया सफल

    एमएस स्वामीनाथन ने हरित क्रांत को सफल बनाने के लिए दो कृषि मंत्रियों (सी. सुब्रमण्यम और जगजीवन राम) के साथ मिलकर काम किया.

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बंगाल के अकाल ने बदली जिंदगी

    साल 1943 में पश्चिम बंगाल में भीषण अकाल पड़ा. भूखमरी को देख और अकाल को खत्म करने के लिए एमएस स्वामीनाथन ने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया.

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