रात को गुप्त तरीके से किया जाता है किन्नरों का अंतिम संस्कार, जानें कारण


किन्नर

    किन्नर भी हमारी तरह इंसान ही होते हैं. लेकिन उनका शारीरिक विकास आम इंसान से थोड़ा अलग होता है.

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किन्नरों की दुनिया

    किन्नरों की दुनिया में आम लोगों का प्रवेश लगभग बंद होता है.

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किन्नरों का अंतिम संस्कार

    किन्नरों के अंतिम संस्कार में कोई आम आदमी नहीं जा सकता है. किन्नरों का अंतिम संस्कार गुप्त तरीके से रात में किया जाता है.

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आम इंसान को नहीं होती खबर

    किन्नर समुदाय के लोग किसी को कानों कान खबर नहीं होने देते कि उनके यहां किसी की मौत हो गई है.

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मौत का आभास

    दरअसल, उन्हें उनकी मौत का आभास हो जाता है. इसलिए वो कहीं भी जाना-आना बंद कर देते हैं. और प्रार्थना करते हैं कि अगले जन्म में वो किन्नर न बनें.

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अंतिम यात्रा

    किसी किन्नर की अंतिम यात्रा में अन्य किन्नर शामिल होकर दुआ लेते हैं. किन्नरो में मान्यता है कि मरणासन्न किन्नर की दुआ बहुत असरदार होती है.

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दफनाया जाता है शव

    किन्नरों में शव को जलाया नहीं बल्कि दफनाया जाता है. अंतिम संस्कार के पूरे प्रोसेस को रात में ही किया जाता है.

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प्रशासन देते हैं सूचना

    जहां शव को दपनाया जाता है उसके बारे में किन्नर प्रशासन को पहले से ही गुप्त सूचना दे दी जाती है ताकि कोई आम इंसान वहां न आ पाए.

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Candel burning

    यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.

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